एक चमकती हुई नदी के किनारे सोमू नाम का एक मछुआरा रहता था। वह हर सुबह सूरज निकलने से पहले अपनी छोटी नाव लेकर नदी के गहरे पानी में निकल जाता था। वह बहुत मेहनती था और ताजी मछलियाँ पकड़कर बाज़ार में बेचता था, जिससे उसका गुजारा चलता था।
एक दिन, नदी पर जाते समय सोमू की मुलाकात कतिर नाम के एक व्यक्ति से हुई। कतिर बहुत आलसी था। वह कोई काम नहीं करता था और बस रास्ते से गुजरने वाले लोगों से मदद मांगता रहता था। सोमू को उस पर दया आ गई और उसने उसे कुछ पैसे दिए। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। सोमू समझ गया कि कतिर सिर्फ गरीब नहीं, बल्कि बहुत आलसी भी है।
सोमू ने कतिर की मदद करने का एक नया तरीका सोचा। उसने कहा, "कतिर, तुम हर बार दूसरों के सामने हाथ क्यों फैलाते हो? कल सुबह नदी के किनारे आना, मैं तुम्हें एक बहुत बड़ा सरप्राइज दूंगा!"
कतिर बहुत खुश हुआ। उस रात वह खुशी के मारे सो भी नहीं पाया। अगली सुबह वह बहुत जल्दी नदी किनारे पहुँच गया, लेकिन सोमू वहाँ नहीं था। कतिर एक बड़े पत्थर पर बैठकर सोमू का इंतज़ार करने लगा।
जब सोमू आया, तो कतिर ने उत्सुकता से पूछा, "साहब, मेरा उपहार कहाँ है?"
सोमू मुस्कुराया और बोला, "उपहार तो मिलेगा, लेकिन पहले तुम्हें मेरी एक छोटी सी मदद करनी होगी। मैं तुम्हें सिखाऊँगा कि जाल को नदी में सही तरीके से कैसे फेंका जाता है। अगर तुम यह कर लोगे, तो तुम्हें तुम्हारा इनाम मिलेगा।"
सोमू ने कतिर को जाल फेंकना सिखाया। फिर दोनों शांति से बैठकर इंतज़ार करने लगे। कुछ देर बाद, सोमू ने जाल खींचने को कहा। जैसे ही जाल बाहर आया, उसमें ढेर सारी मछलियाँ फड़फड़ा रही थीं! कतिर की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने पूछा, "क्या मैं इन मछलियों को बेचकर पैसे ले सकता हूँ?"
सोमू ने उसे एक नया और मजबूत जाल देते हुए कहा, "यही तुम्हारा असली उपहार है, कतिर। आज तुम जल्दी उठे, तुमने मेहनत की और धैर्य रखा। अगर तुम इस जाल से रोज़ मछली पकड़ोगे, तो तुम्हें कभी किसी के आगे हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।"
कतिर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने आलस छोड़ दिया और एक मेहनती मछुआरा बन गया।
Moral
किसी को मछली देने से बेहतर है उसे मछली पकड़ना सिखाना।