एक विशाल जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था। जब वह बूढ़ा हो गया, तो उसने अपने बेटे को राजा बनाने का निर्णय लिया।
उसने अपने मंत्रियों, हाथी और लोमड़ी से सलाह ली। लोमड़ी ने सुझाव दिया, "महाराज, राजकुमार को अनुभव की आवश्यकता है। उन्हें कुछ नए मंत्री चुनने दें और एक यात्रा पर भेजें।"
राजा ने एक तीर चलाया। संयोग से, तीर एक मेंढक के सामने और दूसरा एक कछुए के पास गिरा। जंगल के सभी जानवर हंसने लगे, "क्या एक मेंढक और कछुआ मंत्री बनेंगे?"
राजकुमार ने उनकी बात नहीं मानी और मेंढक और कछुए को अपना मंत्री नियुक्त कर जंगल की यात्रा पर निकल पड़ा।
यात्रा के शुरू में ही मेंढक और कछुआ आराम करने लगे। राजकुमार को गुस्सा आया, लेकिन कछुए ने समझाया, "महाराज, यह लंबी यात्रा है। यदि हम अभी भोजन और ऊर्जा जमा नहीं करेंगे, तो आगे मुश्किल होगी।"
रास्ते में एक तूफान के बाद का रास्ता आया, जहाँ पेड़ गिरे हुए थे। मेंढक ने कहा, "घबराइए नहीं महाराज, हमने पहले ही भोजन इकट्ठा कर लिया है, इसलिए हमें भटकना नहीं पड़ेगा।"
आगे एक बड़ी नदी आई। राजकुमार ने पानी में बुलबुलों को देखा और समझ गया कि जहाँ बुलबुले उठ रहे हैं, वहाँ पत्थर छिपे हैं। उसने पत्थरों पर पैर रखकर सुरक्षित नदी पार कर ली।
तभी उन्होंने एक कबूतर को रोते हुए देखा। कबूतर ने कहा, "साँप ने मेरे अंडे खा लिए क्योंकि मेरा घोंसला नीचे था।" राजकुमार ने कहा, "साँप को दोष देने के बजाय, अगली बार ऊँचे पेड़ पर घोंसला बनाना।"
मेंढक और कछुए ने यह देखकर कहा, "महाराज, आप एक महान राजा हैं। आपने सजा देने के बजाय सही सीख दी।"
राजकुमार समझ गया कि उसके मंत्री ताकतवर नहीं, बल्कि बहुत बुद्धिमान हैं।
Moral
सच्चा नेतृत्व शक्ति में नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने और दूसरों को सिखाने की समझ में होता है।