एक सुंदर घाटी में नीला नाम की एक बहादुर लड़की रहती थी। उसी गाँव में कथीर नाम का एक लड़का रहता था जो सबको डराता रहता था। एक दिन जब नीला बाज़ार से लौट रही थी, कथीर ने उसका रास्ता रोका और उसे डराने की कोशिश की। नीला डरी नहीं, बल्कि उसने हिम्मत से कहा, "दूसरों को डराना बहादुरी नहीं, कायरता है।" इससे कथीर बहुत गुस्सा हो गया।
नीला के पिता जंगल के एक पुराने महल में घूमने गए, जहाँ एक विशाल राक्षस ने उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया। अपने पिता को बचाने के लिए नीला जंगल की ओर निकल पड़ी। जब वह महल पहुँची, तो राक्षस ने उसे देख लिया। नीला ने साहस दिखाया और कहा, "कृपया मेरे पिता को छोड़ दें, उनकी जगह मैं यहाँ रहूँगी।" नीला के बलिदान को देखकर राक्षस ने उसके पिता को तो छोड़ दिया, लेकिन नीला को महल में ही रहने को कहा।
नीला जब रो रही थी, तो उस राक्षस ने उसे एक जादुई नीला दर्पण दिया और कहा, "रो मत, इस दर्पण में तुम देख सकती हो कि तुम्हारे पिता कहाँ हैं।" दर्पण में देखकर नीला ने देखा कि उसके पिता जंगल में भेड़ियों से घिरे हुए हैं। नीला उन्हें बचाने के लिए भागी, तभी एक भेड़िये ने उस पर हमला किया। तभी राक्षस वहाँ आया और उसने भेड़ियों को भगा दिया। इस लड़ाई में राक्षस को चोट लग गई। नीला डरी नहीं, बल्कि उसने राक्षस के घाव पर मरहम लगाया और उसकी देखभाल की।
राक्षस ने कहा, "तुमने मेरी मदद की है, यह दर्पण अपने पास रखो। अगर कभी मुसीबत आए, तो इस दर्पण के ज़रिए मुझे पुकारना।" जब नीला गाँव पहुँची, तो उसने देखा कि कथीर और कुछ लोग उसके पिता को परेशान कर रहे हैं। तभी अचानक जादुई दर्पण में राक्षस का चेहरा दिखाई दिया। डर के मारे गाँव वाले राक्षस को मारने के लिए महल की ओर दौड़ पड़े। नीला ने उन्हें रोकने की कोशिश की, पर कोई नहीं माना।
महल में पहुँचकर कथीर ने एक भाला राक्षस की ओर फेंका जिससे उसे चोट लग गई। राक्षस ज़मीन पर गिर पड़ा। नीला दौड़कर उसके पास गई और फूट-फूटकर रोने लगी। जैसे ही नीला के आँसू राक्षस को छुए, महल में एक तेज़ रोशनी फैल गई। वह राक्षस धीरे-धीरे एक सुंदर राजकुमार में बदल गया। राजकुमार ने कहा, "मेरे स्वभाव के कारण मैं राक्षस था, लेकिन तुम्हारे प्यार ने मुझे फिर से इंसान बना दिया है।" नीला और राजकुमार खुशी-खुशी रहने लगे।
Moral
सच्चा प्रेम और दया कठोर से कठोर हृदय को भी बदल सकते हैं।