एक घने जंगल में सिम्बा नाम का एक शेर राजा था। सिम्बा एक दयालु राजा था, लेकिन जंगल के जानवर आपस में झगड़ते रहते थे और मिल-जुलकर नहीं रहते थे। इस कारण जंगल में शांति नहीं थी।
एक दिन, सिम्बा को पता चला कि जंगल की मुख्य नदी पर सांपों के एक बड़े झुंड ने कब्जा कर लिया है। सांपों ने रास्ते में लेटकर अन्य जानवरों को पानी पीने से रोकना शुरू कर दिया था। सिम्बा नदी पर गया और दहाड़ते हुए बोला, "यह नदी सभी जानवरों की है, तुम इस पर कब्जा नहीं कर सकते!"
लेकिन सांप डरे नहीं। उन्होंने मिलकर सिम्बा को घेर लिया और काटने की कोशिश की। सांपों की संख्या बहुत अधिक थी, इसलिए सिम्बा को वहां से पीछे हटना पड़ा। यह देखकर हाथियों का एक झुंड आया और सांपों को कुचलने की कोशिश की, लेकिन हजारों सांप हाथियों के शरीर पर चढ़ गए और उन्हें काटने लगे। हाथी भी डरकर भाग गए। चीलें भी सांपों को उठाकर ले जाने की कोशिश करने लगीं, पर वे भी नाकाम रहीं।
दूर से यह सब देख रही एक चतुर लोमड़ी समझ गई कि समस्या क्या है। उसने सोचा, "जानवर ताकतवर तो हैं, लेकिन वे अकेले लड़ रहे हैं, इसीलिए हार रहे हैं।" लोमड़ी ने सिम्बा से कहा कि सभी जानवरों की एक सभा बुलाई जाए। सभा में लोमड़ी ने कहा, "आप लोगों में एकता नहीं है, इसीलिए सांपों के इस झुंड ने आप पर कब्जा कर लिया है। अगर आप मिलकर नहीं रह सकते, तो इस जंगल को छोड़ दें!"
जानवर दुखी हो गए और उन्होंने अपनी गलती मानी। उन्होंने सिम्बा से मदद मांगी। लोमड़ी ने एक योजना बनाई। उसने कहा, "सांपों की ताकत उनका जहर है, लेकिन उनका डर साही (porcupine) हैं। साही के पास जहर नहीं होता, लेकिन उसके कांटे बहुत नुकीले होते हैं। अगर हम साही के कांटों का उपयोग करें, तो हम जीत सकते हैं।"
एक भालू ने बताया कि उसे एक जहरीली जड़ी-बूटी के बारे में पता है। सभी जानवरों ने मिलकर वह जड़ी-बूटी इकट्ठा की। बंदरों ने सावधानी से साही के कांटों पर वह जहरीला रस लगा दिया। जब साही का झुंड नदी के पास पहुँचा, तो सांपों ने उन पर हमला किया, लेकिन जहरीले कांटों के संपर्क में आते ही सांप बेहोश होकर गिरने लगे। सांप डर गए और जंगल छोड़कर भाग गए। उस दिन के बाद से, सभी जानवर मिल-जुलकर रहने लगे।