एक हरे-भरे जंगल में चिन्नू नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। चिन्नू बहुत फुर्तीला और समझदार था। एक दिन उसने देखा कि जंगल के सभी जानवर एक बड़े पेड़ के नीचे बहुत परेशान होकर चर्चा कर रहे हैं।
हाथी ने दुखी होकर कहा, 'हमारे राजा अब बूढ़े हो गए हैं, हमें एक नए नेता की ज़रूरत है।' लेकिन कोई भी यह तय नहीं कर पा रहा था कि नया राजा कौन बनेगा।
चिन्नू ने सुझाव दिया, 'क्यों न हम एक प्रतियोगिता रखें? आप सभी अपनी सबसे उपयोगी चीज़ लेकर आएं। जिसकी चीज़ सबसे ज़्यादा काम आएगी, वही हमारा नया राजा बनेगा।'
चिन्नू घर गया और उसने अपनी दादी द्वारा बनाया गया एक खास जड़ी-बूटी का मिश्रण देखा। यह मिश्रण दर्द मिटाने और गहरी नींद लाने के काम आता था। चिन्नू ने सोचा, 'यह सबसे कीमती चीज़ है क्योंकि यह जान बचा सकती है।'
अगले दिन प्रतियोगिता शुरू हुई। जानवरों ने चमकते पत्थर और मीठे फल दिखाए। तभी अचानक जंगल में शिकारियों के आने की आहट सुनाई दी! शिकारी जाल लेकर आ रहे थे। सभी जानवर डर के मारे कांपने लगे।
चिन्नू चिल्लाया, 'दोस्तों, डरो मत! अगर हम भागेंगे तो वे हमें पकड़ लेंगे। इसके बजाय, हम यह जड़ी-बूटी पी लेते हैं और मरने का नाटक करते हैं। उन्हें लगेगा कि हम बीमार हैं और वे चले जाएंगे!'
सभी जानवरों ने चिन्नू की बात मानी और वह मिश्रण पीकर ज़मीन पर लेट गए। जब शिकारी आए, तो उन्होंने देखा कि सभी जानवर बिना हिले-डुले लेटे हैं। एक शिकारी बोला, 'अरे नहीं! लगता है इन जानवरों को कोई बीमारी हो गई है, अगर हमने इन्हें छुआ तो हमें भी बीमारी लग जाएगी।' यह कहकर शिकारी भाग गए।
खतरा टलने के बाद सब जाग गए। चिन्नू की समझदारी से सबकी जान बच गई थी। सब चिन्नू को राजा बनाना चाहते थे, लेकिन चिन्नू ने कहा, 'मुझे अकेला राजा नहीं बनना, बल्कि हम सबको मिलकर रहना चाहिए।'
उस दिन के बाद जंगल बदल गया। हाथियों ने जंगल की रक्षा की, छोटे जानवरों ने भोजन का प्रबंध किया और पक्षियों ने जंगल को साफ रखा। सब मिलकर खुशी-खुशी रहने लगे।
Moral
बुद्धिमानी और एकता से बड़ी से बड़ी मुसीबत को टाला जा सकता है।