एक घने जंगल में चिट्टू नाम की एक छोटी चिड़िया रहती थी। चिट्टू का सपना था कि उसका अपना एक सुंदर और सुरक्षित घोंसला हो। एक दिन, चिट्टू ने बहुत मेहनत की, छोटी-छोटी टहनियाँ और सूखे पत्ते इकट्ठे किए और एक छोटा सा घोंसला बनाया। अपना नया घर देखकर चिट्टू बहुत खुश थी।
लेकिन उसी रात, जंगल में तेज़ तूफ़ान आया। 'सूँ-सूँ...' करती तेज़ हवा चली और चिट्टू का वह प्यारा घोंसला बिखर गया। चिट्टू बहुत दुखी हो गई। उसने सोचा, 'मेरी सारी मेहनत बेकार चली गई!'
अगले दिन, उदास चिट्टू पास के एक गाँव की ओर उड़ गई। वहाँ उसने देखा कि इंसान अपने घर कैसे बनाते हैं। उसने देखा कि कैसे लोग मिट्टी का इस्तेमाल करके दीवारों को मज़बूत बनाते हैं। चिट्टू को एक बात समझ आई—'सिर्फ टहनियों से घर नहीं बनता, उन्हें जोड़ने के लिए मिट्टी की भी ज़रूरत होती है!'
चिट्टू तुरंत जंगल वापस आ गई। इस बार उसने सिर्फ टहनियाँ ही नहीं, बल्कि नदी के किनारे से गीली मिट्टी भी इकट्ठा की। उसने टहनियों के बीच मिट्टी लगाकर बहुत ही मज़बूत और नया घोंसला बनाया।
कुछ दिनों बाद, जंगल में फिर से एक बड़ा तूफ़ान आया। हवा बहुत तेज़ थी, लेकिन चिट्टू का नया घोंसला टस से मस नहीं हुआ। चिट्टू अपने घर के अंदर सुरक्षित और खुश थी। उसने सीखा कि पुरानी गलतियों को सुधारकर नए तरीके अपनाना ही असली समझदारी है।
Moral
गलतियों से सीखना और नए तरीकों को अपनाना ही सफलता की कुंजी है।