एक छोटे से गाँव के स्कूल में अरुण नाम का एक बहुत ही होनहार छात्र रहता था। वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था, लेकिन अक्सर अपने दोस्तों के साथ बातचीत करने में मग्न हो जाता था।
एक दिन, जब शिक्षक कक्षा में पाठ पढ़ा रहे थे, अरुण और उसके कुछ दोस्त पीछे बैठकर धीरे-धीरे बातें कर रहे थे। शिक्षक ने इसे सुन लिया और गुस्से में पूछा, "कौन शोर मचा रहा है?" पूरी कक्षा में सन्नाटा छा गया। सबने डरकर अरुण की ओर देखा।
शिक्षक ने उन्हें सबक सिखाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने कहा, "मैं आज के पाठ से कुछ प्रश्न पूछूँगा। जो सही उत्तर देंगे, वे अपनी सीट पर बैठ सकते हैं, लेकिन जो उत्तर नहीं दे पाएंगे, उन्हें अपनी मेज पर खड़ा होना होगा।"
शिक्षक ने कठिन प्रश्न पूछे और अरुण ने उन सभी का सही उत्तर दिया। लेकिन, जब शिक्षक ने कहा कि जो उत्तर दे चुके हैं वे बैठ जाएँ, तो अरुण नहीं बैठा। वह भी अपने दोस्तों के साथ मेज पर खड़ा हो गया।
उसके सहपाठियों ने हैरान होकर पूछा, "अरुण, तुम्हें तो सब पता था, फिर तुम हमारे साथ मेज पर क्यों खड़े हो?"
अरुण ने बहुत ही शांत भाव से उत्तर दिया, "भले ही मुझे उत्तर पता थे, लेकिन कक्षा में शोर मचाने में मैं भी आप सबके साथ था। जब गलती साझा की थी, तो सजा भी साथ मिलकर ही लेनी चाहिए।"
अरुण की इस ईमानदारी ने शिक्षक का दिल जीत लिया। सभी छात्रों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने शिक्षक से माफी माँगी।
Moral
अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेना ही सच्ची ईमानदारी है।