एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। उसे पिल्लों को पालने का बहुत शौक था। एक सुबह, उसने अपने कुछ पिल्लों को नए घर देने का फैसला किया। उसने एक छोटा सा बोर्ड लिया जिस पर लिखा था, 'प्यारे पिल्ले बिक्री के लिए उपलब्ध हैं,' और वह बाज़ार की ओर चल दिया।
रास्ते में, कविन नाम का एक छोटा लड़का मिला। कविन बहुत ही प्यारा बच्चा था, लेकिन वह अन्य बच्चों की तरह तेज़ नहीं दौड़ पाता था क्योंकि उसका एक पैर थोड़ा टेढ़ा था। बोर्ड देखकर कविन ने धीरे से पूछा, "काका, क्या आपके पास मेरे लिए एक पिल्ला है?"
सोमू ने पूछा, "ये बेचने के लिए हैं बेटा, क्या तुम्हारे पास पैसे हैं?" कविन ने अपनी छोटी सी बचत निकालकर सोमू को दे दी।
सोमू ने एक सीटी बजाई। तुरंत एक माँ कुतिया और उसके चार पिल्ले दौड़ते हुए आए। तीन पिल्ले बहुत फुर्तीले थे और उछलते-कूदते आए। लेकिन चौथा पिल्ला अलग था। वह बहुत धीरे-धीरे, लंगड़ाकर चल रहा था। उसके पैर बाकी पिल्लों की तरह मजबूत नहीं थे।
कविन ने उस धीरे चलने वाले पिल्ले की ओर इशारा किया और कहा, "मुझे यही चाहिए।"
सोमू ने प्यार से समझाया, "बेटा, यह पिल्ला बहुत कमजोर है। यह तुम्हारी तरह ही है, यह तुम्हारे साथ तेज़ नहीं दौड़ पाएगा। तुम कोई फुर्तीला पिल्ला क्यों नहीं ले लेते?"
कविन मुस्कुराया और बोला, "काका, यह पिल्ला बिल्कुल मेरे जैसा है। यह तेज़ नहीं दौड़ सकता, लेकिन यह मुझे समझता है। हम दोनों अपनी धीमी गति से साथ-साथ चलेंगे।"
कविन की बात सुनकर सोमू की आँखें भर आईं। जहाँ दूसरे लोग केवल उसकी कमजोरी देख रहे थे, वहीं कविन ने उसमें एक सच्चा साथी देख लिया था। सोमू ने खुशी-खुशी वह पिल्ला कविन को दे दिया।
Moral
सच्ची मित्रता पूर्णता में नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने और स्वीकार करने में होती है।