एक समय की बात है, विक्रम नाम का एक प्रतापी राजा था। उसकी तीन बेटियाँ थीं। बड़ी दो बेटियाँ बहुत सुंदर थीं, लेकिन सबसे छोटी बेटी मीना बहुत बुद्धिमान थी।
एक दिन राजा ने अपनी बेटियों के प्यार को परखने का फैसला किया। उसने पूछा, "बताओ, तुम मुझसे कितना प्यार करती हो?"
बड़ी बेटी ने कहा, "पिताजी, मैं आपसे उतना ही प्यार करती हूँ जितना सोना कीमती है!" राजा गर्व से मुस्कुराया। दूसरी बेटी ने कहा, "पिताजी, मैं आपसे उतना ही प्यार करती हूँ जितना हीरा चमकता है!" राजा बहुत खुश हुआ।
जब मीना की बारी आई, तो उसने शांति से कहा, "पिताजी, जैसे भोजन में नमक का महत्व है, वैसे ही मेरे जीवन में आपका महत्व है।"
राजा को बहुत गुस्सा आया। "क्या तुम एक मामूली नमक की तुलना मुझसे करती हो?" चिल्लाते हुए उसने मीना को महल से निकाल दिया और जंगल में रहने भेज दिया।
मीना दुखी होकर जंगल चली गई और वहाँ एक दयालु शिकारी के घर में रहने लगी।
कुछ महीनों बाद, राजा शिकार करने जंगल में आया और रास्ता भटक गया। भूख और प्यास से व्याकुल होकर वह एक छोटी सी कुटिया के पास पहुँचा। वह शिकारी का घर था। शिकारी ने राजा को पहचान लिया और आदर के साथ अंदर बुलाया।
मीना ने राजा के लिए भोजन बनाया, लेकिन उसने खाने में नमक नहीं डाला। जब राजा ने खाना खाया, तो उसे कुछ भी स्वाद नहीं आया। उसने पूछा, "इस भोजन में नमक क्यों नहीं है?"
शिकारी ने धीरे से कहा, "महाराज, क्या अब आपको समझ आया कि नमक कितना जरूरी है? सोना और हीरे सुंदर हो सकते हैं, लेकिन नमक के बिना भोजन बेस्वाद होता है।"
राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझ लिया कि उसने चमक-धमक के चक्कर में उस चीज़ को खो दिया जो वास्तव में आवश्यक थी। उसने मीना से माफी मांगी और उसे व शिकारी को महल वापस ले आया।
Moral
साधारण चीजों के महत्व को कभी कम न समझें; वे जीवन के लिए सबसे आवश्यक होती हैं।