बहुत समय पहले की बात है, सूरज केवल एक रोशनी नहीं था, बल्कि सात रंगों का एक सुंदर संसार था। लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी—ये सातों रंग सूरज के सबसे अच्छे दोस्त थे। वे मिलकर दुनिया को सुंदर बनाते थे।
लेकिन उनमें से नीला रंग थोड़ा घमंडी था। वह हमेशा कहती, "मैं ही दुनिया का सबसे सुंदर रंग हूँ! बाकी सब तो फीके हैं।" अन्य रंगों ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, पर उसने किसी की बात नहीं मानी।
एक दिन, जब ये रंग सूरज से धरती की ओर यात्रा कर रहे थे, तो उन्हें हवा के छोटे-छोटे कणों ने रोका। नीला रंग अपनी सुंदरता की डींगें हांकने लगा। यह देखकर हवा के कण नाराज़ हो गए। उन्होंने कहा, "तुम्हें बहुत घमंड है! जो दूसरों का सम्मान नहीं करता, उसे हम धरती तक सीधे जाने का रास्ता नहीं देंगे!"
बाकी सभी रंग आसानी से हवा के बीच से निकलकर धरती पर पहुँच गए। लेकिन नीला रंग हवा के कणों से टकराकर चारों तरफ बिखरने लगा। वह सीधे जाने के बजाय आसमान में इधर-उधर नाचने और छिटकने लगा।
सूरज ने उसे समझाया, "नीले, अगर तुम विनम्र होतीं, तो तुम भी बाकी रंगों की तरह धरती तक पहुँच पातीं। लेकिन तुम्हारे घमंड ने तुम्हें हर तरफ बिखेर दिया है।"
आज जब हम आसमान की ओर देखते हैं, तो वह नीला दिखाई देता है क्योंकि नीला रंग हवा के कणों से टकराकर पूरे आसमान में फैल गया है। यहाँ तक कि समुद्र भी उसी नीले रंग को दर्शाता है।
Moral
घमंड इंसान को अकेला कर देता है, जबकि विनम्रता उसे मंज़िल तक पहुँचाती है।