विक्रम नाम का एक राजा एक बहुत बड़े राज्य पर शासन करता था। जब वह बूढ़ा होने लगा, तो उसने अपने बेटे आदित्य को उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय लिया। लेकिन आदित्य बहुत ही लापरवाह था, इसलिए मंत्रियों को उसे राजा बनाने में संकोच हो रहा था।
"मेरा बेटा सक्षम है," राजा ने कहा। मंत्रियों ने एक शर्त रखी, "महाराज, किसान एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। पक्षियों के झुंड आकर उनकी फसलें खा जाते हैं। यदि राजकुमार इस समस्या को हल कर देते हैं, तो वे राजा बनेंगे, अन्यथा आपकी बेटी को उत्तराधिकारी चुना जाएगा।"
आदित्य ने चुनौती स्वीकार की। खेतों का निरीक्षण करते समय उसने एक हाथी को देखा जो अपने कान फड़फड़ा रहा था। उसे एक विचार आया। वह महल गया और आदेश दिया कि हर किसान को एक हाथी दिया जाए। उसने हर हाथी के कान में एक बड़ी घंटी भी बांध दी।
"जब हाथी कान हिलाएंगे, तो घंटियों की आवाज़ से पक्षी डरकर भाग जाएंगे!" आदित्य ने गर्व से कहा।
अगली सुबह महल के बाहर बहुत शोर मचा। राजा और मंत्री बाहर आए तो देखा कि किसान गुस्से में थे। "राजकुमार ने हमें बर्बाद कर दिया है!" वे चिल्ला रहे थे।
राजा ने हैरान होकर पूछा, "क्या पक्षी नहीं भागे?"
एक किसान ने कहा, "महाराज, पक्षी तो भाग गए, लेकिन आपके दिए हुए हाथियों ने हमारी सारी फसलें खा लीं! उन्होंने बचे हुए अनाज को भी अपने पैरों से कुचल दिया। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा है!"
राजा दुखी होकर बोले, "मेरा बेटा बिना सोचे-समझे काम करता है।"
तब मंत्रियों ने सुझाव दिया कि राजकुमारी से मदद ली जाए। राजकुमारी मीनाक्षी ने समस्या सुनी और मुस्कुराते हुए कहा, "पिताजी, घबराइए मत। हम इन हाथियों को अभी नहीं हटाएंगे। हम उनके गोबर का उपयोग खाद के रूप में करेंगे जिससे मिट्टी उपजाऊ बनेगी। साथ ही, हम हाथियों की शक्ति का उपयोग खेतों से बड़े पत्थरों और झाड़ियों को हटाने के लिए करेंगे। मानसून आने तक खेत पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। सरकार बीज और सहायता प्रदान करेगी।"
राजकुमारी की बुद्धिमानी देखकर राजा समझ गए कि राज्य चलाने के लिए असली नेतृत्व मीनाक्षी के पास है।
Moral
बिना सोचे-समझे किया गया समाधान नई समस्या पैदा कर सकता है।