बर्फ से ढके एक विशाल जंगल में लूना नाम की एक नन्हीं हिरणी रहती थी। अन्य हिरणों की तरह लूना के बड़े सींग नहीं थे, लेकिन उसकी एक अनोखी विशेषता थी—उसकी चमकदार लाल नाक। वह नाक देखने में बहुत सुंदर थी, लेकिन दूसरे हिरण उसका मज़ाक उड़ाते थे और कहते थे, 'तुम बहुत छोटी हो, तुम हमारे किसी काम की नहीं हो।' इससे लूना बहुत उदास रहने लगी और अकेले ही बर्फ में घूमने लगी।
एक बर्फीली रात में, लूना ने देखा कि एक बड़ी सजी हुई गाड़ी बर्फ में फंसी हुई है। वह गाड़ी उपहार बांटने वाले दादाजी की थी। लूना उनके पास गई और धीरे से पूछा, 'दादाजी, मैं बहुत छोटी हूँ, क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकती हूँ?'
दादाजी ने प्यार से कहा, 'तुम्हारी सोच बहुत अच्छी है नन्हीं लूना, लेकिन अभी बहुत तेज़ बर्फबारी हो रही है।' तभी अचानक घना कोहरा छा गया। कोहरा इतना गहरा था कि दादाजी को सामने का रास्ता बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा था। गाड़ी एक गहरी खाई की ओर बढ़ रही थी।
तभी लूना ने हिम्मत दिखाई और कहा, 'दादाजी, घबराइए मत! मेरी लाल नाक इस घने कोहरे में भी दूर से चमकती है। मैं आगे चलकर आपको रास्ता दिखाऊँगी!'
लूना गाड़ी के आगे दौड़ने लगी। उसकी चमकती लाल नाक एक लालटेन की तरह काम कर रही थी, जो कोहरे को चीरते हुए रास्ता दिखा रही थी। उस रोशनी का पीछा करते हुए दादाजी सुरक्षित रूप से गाड़ी चला पाए। लूना की मदद से उस रात सभी बच्चों तक उपहार पहुँच सके।
जब यात्रा पूरी हुई, तो दादाजी ने लूना को गले लगाया और कहा, 'तुम भले ही छोटी हो, लेकिन तुम्हारी इस चमक ने आज कमाल कर दिया!' उस दिन के बाद से लूना ने कभी खुद को कमतर नहीं समझा। उसे समझ आ गया कि उसकी विशिष्टता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
Moral
आपकी विशेषता ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है।