एक शांत गाँव में नीला नाम की एक बहुत ही दयालु लड़की रहती थी। नीला देवी और उनकी बेटी माया के घर में काम करती थी। लेकिन देवी और माया बहुत ही कठोर स्वभाव की थीं। वे अक्सर नीला को बिना वजह परेशान करती थीं और उसे बहुत कठिन काम देती थीं। एक दिन माया ने जानबूझकर नीला के कपड़े फाड़ दिए जिससे वह रोने लगी। एक अन्य दिन, देवी ने फर्श पर दूध गिरा दिया और नीला को उसे साफ करने के लिए मजबूर किया और उसका मजाक उड़ाया।
एक दोपहर, जब नीला अपना खाना खा रही थी, देवी ने गुस्से में आकर कहा, "तुम्हें अभी जंगल जाकर लकड़ियों का एक बड़ा गट्ठर लाना होगा!" नीला ने हिचकिचाते हुए कहा, "लेकिन मालकिन, मैं इतना भारी बोझ कैसे उठा पाऊंगी?" यह सुनकर देवी और भी क्रोधित हो गईं और उन्होंने नीला की थाली को जमीन पर पटक दिया। दुखी होकर, नीला ने अपने खाने का कुछ हिस्सा एक छोटे कपड़े में बांधा और जंगल की ओर चल दी।
जंगल में चलते समय, नीला को एक झाड़ी के पास एक छोटा कुत्ता मिला जो भूख से बहुत कमजोर लग रहा था। नीला का दिल पिघल गया। वह पास की एक नदी से पानी लाई और उस कुत्ते को पिलाया। फिर, उसने अपना बचा हुआ खाना भी उस कुत्ते के साथ बाँट लिया। धीरे-धीरे ताकत आने पर, कुत्ते ने अपनी पूंछ हिलाई और नीला की ओर प्यार से देखा।
नीला लकड़ियाँ ढूँढने के लिए आगे बढ़ी, और वह छोटा कुत्ता उसके पीछे-पीछे चलने लगा। नीला ने अपना बचा हुआ आखिरी हिस्सा भी उस कुत्ते को खिला दिया। तभी अचानक आसमान में बिजली कड़की! एक तेज़ रोशनी के साथ, वह कुत्ता एक सुंदर राजकुमार में बदल गया। नीला डर गई और पीछे हट गई। राजकुमार ने प्यार से कहा, "डरो मत नीला! एक जादूगरनी के श्राप के कारण मैं कुत्ता बना हुआ था। उसने कहा था कि जो कोई भी बिना किसी स्वार्थ के अपना भोजन साझा करेगा, वही मेरा श्राप तोड़ पाएगा। मैंने बहुत लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने नहीं दी। तुमने बिना किसी लालच के मेरी मदद की, इसलिए मेरा श्राप टूट गया है।"
राजकुमार नीला को अपने घोड़े पर बैठाकर एक भव्य महल में ले गया। महल के अंदर पहुँचते ही नीला हैरान रह गई। वहाँ देवी और माया नौकरानी के रूप में काम कर रही थीं! उनके बुरे व्यवहार के कारण राजा ने उन्हें सजा दी थी। नीला ने दया दिखाते हुए कहा, "राजकुमार, कृपया इन्हें और सजा न दें, इन्हें इनके घर भेज दें।" नीला की इस महानता को देखकर महल के सभी लोग बहुत खुश हुए और उन्होंने नीला को राज्य की अगली राजकुमारी घोषित कर दिया। नीला अब एक खुशहाल जीवन जीने लगी।
Moral
निस्वार्थ भाव से की गई मदद हमेशा सुखद परिणाम लाती है।