माया को अपने मामा से बहुत लगाव था। उसके जन्मदिन पर, मामा उसके लिए एक छोटा सा लकड़ी का सिपाही लेकर आए। वह खिलौना देखने में बहुत सुंदर नहीं था; उसका चेहरा थोड़ा अजीब और दागों वाला था। माया को पहले तो वह पसंद नहीं आया, लेकिन मामा के प्यार की वजह से उसने उसे अपनी गुड़ियों के पास सजा कर रख दिया।
उस रात माया ने एक अजीब सपना देखा। उसने देखा कि उसके कमरे में चूहों की एक पूरी सेना घुस आई है! उनके बीच एक बड़ी, डरावनी चुहिया रानी थी जो सब कुछ तहस-नहस कर रही थी। तभी, वह लकड़ी का सिपाही अचानक जीवित हो उठा! "डरो मत माया! मैं तुम्हारे साथ हूँ!" वह चिल्लाया। उसने अपने साथी खिलौना सैनिकों के साथ मिलकर चूहों का मुकाबला करना शुरू कर दिया। वे छोटे-छोटे ढाल और तलवारों से लड़ रहे थे, तभी एक बड़ा चूहा माया की ओर झपटा और माया डरकर जाग गई।
रोती हुई माया अपने मामा के पास गई और सब कुछ बताया। मामा ने मुस्कुराते हुए उस सिपाही की कहानी सुनाई। "माया, यह सिपाही एक महान नायक का प्रतीक है। बहुत समय पहले, एक बहादुर सेनापति ने एक राजकुमारी को चुहिया रानी के श्राप से बचाने के लिए अपनी सुंदरता का त्याग कर दिया था। उसने राजकुमारी को तो बचा लिया, लेकिन उसका चेहरा बदल गया। इसीलिए, बच्चों को बहादुर बनाने के लिए हम यह खिलौना देते हैं।"
यह सुनकर माया का डर गायब हो गया। अब उसे वह सिपाही बहुत सुंदर और बहादुर लगने लगा। उसने तय किया कि अब वह किसी भी चीज़ से नहीं डरेगी, क्योंकि उसके पास उस बहादुर सिपाही की यादें हैं।
Moral
असली सुंदरता चेहरे में नहीं, बल्कि साहस और त्याग में होती है।