विद्यपुर नामक एक विशाल राज्य में आर्यन नाम का एक राजकुमार रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था और अपना सारा समय पुस्तकालय में प्राचीन पुस्तकें पढ़ने में बिताता था। लेकिन उसके मन में एक बेचैनी थी। वह सोचता था, 'इतना ज्ञान होने के बाद भी मेरे मन में शांति क्यों नहीं है? क्या मैं एक अच्छा राजा बनने के योग्य हूँ?'
एक दिन बगीचे में टहलते समय, उसने एक चमकता हुआ नीला फूल देखा। उसने माली से पूछा, 'यह अद्भुत फूल क्या है?' माली ने कहा, 'राजकुमार, यह एक जादुई फूल है। यदि आप इससे शांति मांगेंगे, तो यह आपको सही रास्ता दिखाएगा।'
जैसे ही आर्यन ने फूल को छुआ, वह एक जादुई जंगल में पहुँच गया। वहाँ एक वृद्ध ज्ञानी बैठे थे। आर्यन ने उनसे पूछा, 'महाराज, मैंने बहुत कुछ पढ़ा है, फिर भी मेरे मन को शांति क्यों नहीं मिलती?'
ज्ञानी मुस्कुराए और बोले, 'ज्ञान केवल किताबों में नहीं होता। जब तुम दुनिया और लोगों के साथ जुड़ते हो, तभी तुम्हें वास्तविक शांति और बुद्धि मिलती है।'
अचानक आर्यन अपने बगीचे में वापस आ गया। उसने देखा कि कुछ बच्चे मिलकर एक पहेली सुलझाने की कोशिश कर रहे थे। वे एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। आर्यन ने उनसे पूछा, 'तुम लोग अकेले क्यों नहीं खेलते? मिलकर क्यों कर रहे हो?'
बच्चों ने हंसते हुए कहा, 'अगर हम अकेले खेलेंगे, तो हम केवल वही सीखेंगे जो हमें आता है। लेकिन साथ मिलकर खेलने से हम एक-दूसरे से नया सीखते हैं और बहुत मज़ा आता है!'
आर्यन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझ लिया कि ज्ञान केवल इकट्ठा करने के लिए नहीं, बल्कि बांटने के लिए है। उसने लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना शुरू किया। उसकी इस समझदारी को देखकर राजा ने उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। अब वह एक बुद्धिमान और दयालु राजा था।
Moral
सच्चा ज्ञान वही है जिसे दूसरों के साथ साझा किया जाए।