एक घने जंगल के बीचों-बीच, पत्थरों के ऊपर से एक छोटी सी नदी बहती थी। नदी के किनारे एक बहुत बड़ा और घना आम का पेड़ खड़ा था। वह पेड़ हमेशा हरा-भरा रहता था और मीठे आमों से लदा रहता था।
उसी नदी के किनारे टोबी नाम का एक छोटा और प्यारा कछुआ रहता था। टोबी बहुत ही शांत स्वभाव का था, लेकिन उसकी एक बड़ी इच्छा थी—उस ऊँचे पेड़ पर लगे रसीले आमों का स्वाद चखना।
हर दिन टोबी देखता कि रंग-बिरंगे पक्षी पेड़ की टहनियों पर आकर मज़े से आम खा रहे हैं। "आह! वे आम कितने मीठे होंगे!" टोबी आह भरता। वह पेड़ के नीचे इंतज़ार करता कि शायद कोई आम गिर जाए, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता। टोबी न तो उड़ सकता था और न ही पेड़ पर चढ़ सकता था। इसलिए वह अक्सर उदास होकर सोचता, "शायद ये मीठे फल मेरे नसीब में नहीं हैं।"
एक दोपहर, आम के पेड़ ने अपनी पत्तियाँ हिलाते हुए टोबी से पूछा, "टोबी, तुम इतने उदास क्यों हो?"
टोबी ने अपनी इच्छा बताई। पेड़ ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, "टोबी, धैर्य का मतलब सिर्फ इंतज़ार करना नहीं है, बल्कि इंतज़ार करते समय उम्मीद बनाए रखना है। अगर तुम रोज़ यहाँ आते रहोगे और भरोसा रखोगे, तो सही समय आने पर फल खुद तुम्हारे पास आएगा।"
टोबी ने पेड़ की बात मान ली। अगले दिन से उसने एक नियम बना लिया। वह रोज़ सुबह पेड़ के पास आता, उसकी छाया में आराम करता और ध्यान से देखता कि फल कैसे बड़े हो रहे हैं। कई दिन बीत गए। कभी फल छोटे और हरे होते, तो कभी थोड़े खट्टे। लेकिन टोबी ने हार नहीं मानी।
कई हफ्तों बाद, एक सुनहरी सुबह जब टोबी पेड़ के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि ज़मीन पर एक बड़ा, पका हुआ और सुनहरा आम पड़ा है! वह बहुत खुशबूदार और रसीला दिख रहा था।
टोबी ने जैसे ही आम का एक टुकड़ा खाया, उसकी आँखें चमक उठीं। "वाह! यह तो बहुत ही मीठा है! मैंने जैसा सोचा था, यह उससे भी कहीं ज़्यादा स्वादिष्ट है!" वह खुशी से झूम उठा।
पेड़ ने हवा के झोंके के साथ कहा, "देखा टोबी! अगर तुम तब हार मान लेते जब फल कच्चे और खट्टे थे, तो आज तुम्हें यह मिठास नहीं मिल पाती। तुम्हारी निरंतरता और धैर्य ने ही तुम्हें यह इनाम दिलाया है।"
टोबी समझ गया कि धैर्य का फल हमेशा मीठा होता है। उस दिन के बाद से, उसने हर काम को शांति और विश्वास के साथ करना शुरू कर दिया।
Moral
धैर्य और निरंतर प्रयास से ही जीवन में सफलता का मीठा स्वाद मिलता है।