एक बहुत ही घने जंगल में एक जादुई पेड़ के बारे में मशहूर था कि जो भी उसके सामने मांगी गई इच्छा पूरी करता है, उसे वह मिल जाती है। लेकिन एक चेतावनी भी थी कि उस पेड़ से मांगी गई चीजें अंत में दुख ही लाती हैं।
एक दिन, एक चतुर गधा, एक लालची लोमड़ी और एक ताकतवर भालू उस पेड़ की तलाश में निकले। जंगल बहुत घना था, इसलिए उन्होंने तय किया कि वे अलग-अलग दिशाओं में जाकर खोजेंगे।
सबसे पहले भालू को वह पेड़ मिला। भालू ने गरजा, 'मैं इस जंगल का राजा बनना चाहता हूँ!' आसमान से एक आवाज़ आई, 'तुम्हारी इच्छा पूरी हुई।' भालू बड़े गर्व से जंगल के राजा की तरह चलने लगा। लेकिन वहाँ पहुँचकर उसे पता चला कि शेर राजा बीमार हैं और मंत्रियों को एक अस्थायी राजा की ज़रूरत है। भालू को राजा बना दिया गया। पहले तो भालू बहुत खुश हुआ, लेकिन जल्द ही मुसीबतें शुरू हो गईं। हर जानवर अपनी समस्या लेकर भालू के पास आने लगा—कोई कह रहा था कि उसे भूख लगी है, तो कोई कह रहा था कि उसका घर टूट गया है। भालू को चैन की नींद भी नहीं मिली। अपनी गलती का एहसास होते ही भालू डरकर जंगल में छिप गया।
उसी समय लोमड़ी को वह पेड़ मिला। उसने लालच में आकर कहा, 'मुझे बहुत सारा सोना और गहने चाहिए!' आसमान से आवाज़ आई, 'अपने घर के पास देखो।' लोमड़ी दौड़कर अपने घर गई और वहाँ सोने का ढेर देखकर खुश हो गई। लेकिन जल्द ही वह अकेली पड़ गई। दूसरे जानवर उससे बात करना भी छोड़ दिए। जब उसे भूख लगती, तो जानवर कहते, 'तुम तो बहुत अमीर हो, खुद ही खाना खरीद लो!' अकेलापन और भूख सहते हुए लोमड़ी ने सारा सोना ज़मीन में गाड़ दिया और वापस अपनी पुरानी ज़िंदगी में लौट आई।
अंत में गधा उस पेड़ के पास पहुँचा। गधे ने अपने लिए कुछ नहीं माँगा। उसने कहा, 'हे जादुई पेड़, मैं चाहता हूँ कि इस जंगल के सभी जानवर बिना भूख और डर के खुशी-खुशी रहें। अगर किसी को मदद की ज़रूरत हो, तो मैं उनके काम आ सकूँ।'
आसमान से एक मधुर आवाज़ आई, 'चूंकि तुमने दूसरों की खुशी के लिए माँगा है, इसलिए तुम्हें हमेशा मानसिक शांति मिलेगी और तुम्हारी ज़रूरतें भी अपने आप पूरी होंगी।'
गधा जब घर लौटा, तो उसने देखा कि जब भी वह किसी की मदद करता, उसे खुद के लिए भी पर्याप्त भोजन और सुख मिल जाता। गधा दूसरों की मदद करके और बचा हुआ खाना खाकर बहुत खुशी से रहने लगा। गधा उस जंगल का सबसे सम्मानित और प्यारा जानवर बन गया।
Moral
दूसरों की भलाई चाहने वालों को जीवन में सुख और शांति अवश्य मिलती है।