पहाड़ों के पास बसे एक सुंदर गाँव में निला नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। उसे लाल रंग की टोपी पहनना बहुत पसंद था, इसलिए गाँव वाले उसे प्यार से 'लाल टोपी वाली निला' कहते थे।
एक दिन निला की दादी माँ की तबीयत खराब हो गई। निला ने उनके लिए ताजे फल और शहद लेकर जंगल में बनी उनकी कुटिया तक जाने का फैसला किया। जंगल के रास्ते में, उसने एक बूढ़े लकड़हारे को थककर बैठे देखा। निला उसके पास गई और बड़े प्यार से पूछा, "बाबा, क्या आप ठीक हैं? क्या आपको पानी चाहिए?"
अकेले रहने वाले उस लकड़हारे को निला की इस बात ने बहुत खुश कर दिया। उसने मुस्कुराकर कहा, "धन्यवाद बिटिया, तुम बहुत ही नेक दिल बच्ची हो।"
लेकिन पास की झाड़ियों में छिपी एक लोमड़ी यह सब सुन रही थी। लोमड़ी के मन में एक दुष्ट विचार आया। वह तेजी से दौड़कर दादी की कुटिया पहुँची और दादी को एक कमरे में छिपा दिया। फिर वह दादी के कपड़े और चश्मा पहनकर बिस्तर पर लेट गई।
जब निला कुटिया पहुँची, तो उसे कुछ अजीब लगा। उसने बिस्तर के पास जाकर पूछा, "दादी माँ, आपकी आँखें आज इतनी बड़ी क्यों लग रही हैं?"
लोमड़ी ने अपनी आवाज़ बदलकर कहा, "ताकि मैं तुम्हें और अच्छे से देख सकूँ, प्यारी बच्ची।"
निला ने फिर पूछा, "दादी माँ, आपके हाथ इतने बड़े क्यों हैं?"
"तुम्हें गले लगाने के लिए," लोमड़ी ने लालच से जवाब दिया।
अंत में, निला ने कांपते हुए पूछा, "दादी माँ, आपके दाँत इतने नुकीले क्यों हैं?"
"तुम्हें खाने के लिए!" लोमड़ी चिल्लाई और बिस्तर से कूद पड़ी।
निला ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ सुनकर लकड़हारा तुरंत अपनी कुल्हाड़ी लेकर कुटिया की ओर भागा। इससे पहले कि लोमड़ी निला को नुकसान पहुँचा पाती, लकड़हारा अंदर पहुँच गया और उसने लोमड़ी को भगा दिया। दादी भी सुरक्षित बाहर आ गईं।
निला ने रोते हुए कहा, "बाबा, आपने सही समय पर आकर मेरी जान बचा ली, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!"
लकड़हारे ने निला को आशीर्वाद दिया और उसे गले लगा लिया।