एक समय की बात है, सोमनाथ नाम का एक बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति रहता था। उसकी चतुराई के चर्चे दूर-दूर तक थे। यह सुनकर पड़ोसी देश के राजा विक्रम ने उसे नीचा दिखाने की योजना बनाई। राजा ने एक पत्र भेजा, 'हमारे विद्वानों के सवालों का जवाब दो। यदि तुम हार गए, तो दुनिया जान जाएगी कि तुम केवल एक ढोंगी हो।'
सोमनाथ राजा की चाल समझ गया। वह अपने वफादार गधे, चतुर को साथ लेकर राजदरबार में पहुँचा। दरबार में गधे को देखकर सभी दरबारी हैरान रह गए।
राजा ने पूछा, 'तुम इस जानवर को यहाँ क्यों लाए हो?'
सोमनाथ ने शांति से कहा, 'महाराज, चतुर केवल एक जानवर नहीं, मेरी बुद्धि का साथी है। जब यह मेरे पास होता है, तभी मैं सही से सोच पाता हूँ।'
पहले विद्वान ने पूछा, 'इस संसार में सबसे मूल्यवान वस्तु क्या है?'
सोमनाथ ने उत्तर दिया, 'ईमानदार मेहनत का पसीना। बहुत से लोग केवल अपने स्वार्थ के लिए काम करते हैं, लेकिन यह गधा दूसरों का बोझ ढोकर उनके लिए पसीना बहाता है। वही पसीना सबसे कीमती है।'
दूसरे विद्वान ने पूछा, 'बादल का वजन कैसे मापा जा सकता है?'
सोमनाथ मुस्कुराया और बोला, 'एक तराजू के एक पलड़े में बादल को रखो और दूसरे में इस गधे की परछाई को। जब दोनों बराबर हो जाएँ, तब समझ लेना कि बादल का वजन कितना है।'
तीसरे विद्वान ने पूछा, 'सबसे महान शासक कौन है?'
सोमनाथ ने अपने गधे की ओर इशारा किया। दरबार में हँसी और गुस्सा फैल गया। 'एक गधा शासक कैसे हो सकता है?' लोग चिल्लाए।
सोमनाथ ने समझाया, 'सच्चा शासक वह है जो स्वयं पर शासन करता है। राजा दूसरों को डराकर या ज़बरदस्ती से नियंत्रित करते हैं, लेकिन चतुर खुद को नियंत्रित करता है। जब उसे थकान होती है, वह आराम करता है। उसे कोई भी अपनी मर्जी के खिलाफ नहीं चला सकता। जो खुद पर काबू रखता है, वही असली नायक है।'
राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। सोमनाथ की चतुराई देखकर राजा ने उनसे माफी माँगी और उन्हें ढेर सारे उपहार देकर सम्मानित किया।
Moral
बुद्धिमानी से किसी भी कठिन परिस्थिति को अवसर में बदला जा सकता है।