एक छोटे से गाँव में कविन नाम का एक शरारती लड़का रहता था। कविन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसे छुपकर मिठाइयाँ खाने और घर में इधर-उधर छिपने की आदत थी। एक दिन, कविन ने रसोई से सारी चॉकलेट्स चुपके से खा लीं और अलमारी के पीछे छिप गया। उसकी माँ ने उसे बहुत ढूँढा, लेकिन वह नहीं मिला।
जब कविन बाहर आया, तो माँ को पता चल गया कि उसने शरारत की है। माँ ने कहा, "कविन, आज तुम्हें सजा मिलेगी! तुम्हें बगीचे की पूरी बाड़ (fence) को सफेद रंग से पेंट करना होगा।"
कविन उदास होकर पेंट करने लगा। तभी उसका दोस्त राहुल वहाँ आया। "कविन, तुम क्या कर रहे हो?" राहुल ने पूछा। कविन के दिमाग में एक तरकीब आई। उसने झूठ बोलते हुए कहा, "राहुल, यह कोई काम नहीं है, यह तो एक मजेदार खेल है! मैंने अपनी बचत के पैसों से माँ को पैसे दिए हैं ताकि मैं इस 'पेंटिंग गेम' में हिस्सा ले सकूँ!"
राहुल हैरान रह गया और बोला, "क्या मैं भी खेल सकता हूँ?" कविन ने कहा, "हाँ, लेकिन तुम्हें इसके लिए अपना खिलौना मुझे देना होगा!" राहुल मान गया। इसके बाद कविन ने अपने दूसरे दोस्त को भी यही बात कहकर उससे रंगीन गेंदें ले लीं।
शाम होते-होते बाड़ एकदम चमक उठी और कविन ने बहुत सारे खिलौने इकट्ठा कर लिए। जब माँ ने खिड़की से यह सब देखा, तो उन्हें पहले तो गुस्सा आया, लेकिन कविन की चतुराई देखकर वे अपनी हँसी नहीं रोक पाईं।
Moral
बुद्धिमानी से कठिन काम भी आसान हो जाते हैं।