एक घने जंगल में सभी जानवर और पक्षी बहुत व्यस्त थे। मानसून का मौसम आने वाला था, इसलिए सभी अपने लिए भोजन इकट्ठा करने और सुरक्षित ठिकाने बनाने में लगे थे। चींटियाँ दाने जमा कर रही थीं और गिलहरियाँ फल इकट्ठा कर रही थीं।
लेकिन उसी जंगल में मिलो नाम का एक बंदर रहता था, जो बहुत ही आलसी था। जब सब काम करते, मिलो पेड़ की टहनियों पर सोता रहता। वह कहता, "अभी तो बहुत समय है, अभी इतनी मेहनत क्यों करना?"
तभी अचानक मौसम बदल गया और ज़ोरदार बारिश शुरू हो गई। तेज़ हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी। सभी जानवर अपने घरों और गुफाओं में सुरक्षित छिप गए। लेकिन मिलो बारिश में पूरी तरह भीग गया और ठंड से कांपने लगा। उसके पास न तो खाने को कुछ था और न ही सिर छुपाने की जगह।
पास के एक छोटे से घोंसले से पिप नाम की एक नन्ही गौरैया ने उसे देखा। पिप ने बड़े प्यार से कहा, "मिलो दोस्त, अगर तुमने धूप निकलने पर अपना घर बना लिया होता और थोड़ा खाना जमा कर लिया होता, तो आज तुम्हें यह मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।"
मिलो को यह बात सुनकर बहुत गुस्सा आया। उसे अपनी गलती मानने के बजाय दूसरों की सलाह सुनना बुरा लगा। उसने चिल्लाकर कहा, "अपने काम से काम रखो! मुझे तुम्हारी नसीहत नहीं चाहिए!" गुस्से में आकर मिलो ने पिप के घोंसले को झटक दिया, जिससे उसका बनाया हुआ सुंदर घर और जमा किया हुआ अनाज सब बिखर गया।
पिप बहुत दुखी हुई। मिलो को अपनी गलती का एहसास तो हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसने सीखा कि सही समय पर दी गई सलाह को न मानना और मदद करने वालों का अपमान करना बहुत बड़ी गलती है।
Moral
बुद्धिमानी भरी सलाह को स्वीकार करना चाहिए और मदद करने वालों का सम्मान करना चाहिए।