एक सुंदर गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। उसके पास शेरू नाम का एक वफादार कुत्ता और भोलू नाम का एक मेहनती गधा था। शेरू खेत की रखवाली करता था और भोलू भारी बोझ ढोने का काम करता था।
एक रात, शेरू ने झाड़ियों में हलचल सुनी। उसने देखा कि जंगली सूअर खेत की फसल बर्बाद कर रहे हैं। शेरू ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा। सोमू लाठी लेकर दौड़कर आया और सूअरों को भगा दिया। शेरू की बहादुरी देखकर सोमू ने उसे रात में विशेष भोजन दिया।
यह देखकर भोलू गधे के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'शेरू तो बस भौंकता है और उसे ज़्यादा खाना मिलता है! अगर मैं भी शोर मचाऊँगा, तो सोमू मुझे भी ज़्यादा खाना देगा।'
अगले दिन से, भोलू ज़रा सी आहट होने पर भी ज़ोर-ज़ोर से रेंकने लगा। इससे सोमू की नींद खराब होने लगी। परेशान होकर सोमू गाँव के एक बुद्धिमान बुजुर्ग के पास गया।
बुजुर्ग ने कहा, "सोमू, हर जीव का अपना एक स्वभाव और काम होता है। कुत्ता रखवाली के लिए है और गधा बोझ उठाने के लिए। अगर गधा कुत्ते की नकल करेगा, तो वह अपना काम नहीं कर पाएगा। उन्हें उनके स्वभाव के अनुसार रहने दो।"
सोमू को बात समझ आ गई। शेरू ने रखवाली जारी रखी और भोलू ने खुशी-खुशी बोझ ढोना शुरू किया। दोनों अपने काम में संतुष्ट रहने लगे।
Moral
दूसरों की नकल करने के बजाय अपने काम को कुशलता से करना ही असली बुद्धिमानी है।