एक सुंदर शहर में रवि नाम का एक बहुत ही प्रतिभाशाली चित्रकार रहता था। रवि की कला इतनी अद्भुत थी कि उसके द्वारा बनाए गए पक्षी और प्रकृति के दृश्य जीवंत लगते थे। दुनिया भर के लोग उसकी पेंटिंग्स खरीदने के लिए उत्सुक रहते थे।
एक शाम, रवि ने अपने कुछ करीबी दोस्तों को रात के खाने पर अपने घर बुलाया। उन्हीं दोस्तों में उसका पुराना मित्र सोमू भी था। जब सोमू रवि के घर पहुँचा, तो उसने देखा कि घर बहुत ही साफ़-सुथरा और सुंदर है, लेकिन एक अजीब बात थी—घर की दीवारें पूरी तरह खाली थीं। वहाँ एक भी पेंटिंग नहीं टंगी थी।
सोमू ने हैरानी से पूछा, "रवि, तुम्हारी पेंटिंग्स की दुनिया भर में बहुत मांग है। लोग उन्हें पाने के लिए बहुत पैसे खर्च करते हैं। फिर तुम्हारे अपने घर की दीवारों पर एक भी तस्वीर क्यों नहीं है?"
रवि धीरे से मुस्कुराया और बोला, "सोमू, मेरी कला अब दुनिया की धरोहर है। वे लोगों के घरों और संग्रहालयों में खुशी बाँट रही हैं। मैं कोई बहुत बड़ा अमीर आदमी नहीं हूँ कि अपनी ही बनाई हुई महंगी पेंटिंग्स को खुद ही खरीदकर अपने घर की दीवारों पर लगा सकूँ।"
रवि की इस सादगी और अपनी कला को दूसरों के लिए समर्पित करने की भावना को देखकर सोमू दंग रह गया। उसने महसूस किया कि रवि का लक्ष्य प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि अपनी कला से दूसरों के जीवन में रंग भरना है।
Moral
सादगी और परोपकार ही मनुष्य के वास्तविक गुण हैं।