एक घने जंगल में पिप नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। एक दिन जब पिप घास चर रहा था, तभी आसमान से एक विशाल बाज नीचे आया। बाज को बहुत भूख लगी थी और उसकी नज़र पिप पर थी।
तभी पिप का दोस्त बज़, जो एक छोटी सी मधुमक्खी थी, वहाँ आ पहुँचा। बज़ बहुत बहादुर थी। उसने बाज से विनती की, "कृपया मेरे दोस्त को छोड़ दीजिए, उसने आपका कुछ नहीं बिगाड़ा है!"
लेकिन बाज ने बज़ की बात नहीं मानी। उसने बज़ को डराकर भगाने की कोशिश की, और इसी बीच उसने पिप को पकड़ लिया और उसे खा गया। यह देखकर बज़ बहुत दुखी हुई और उसने बाज से बदला लेने की ठान ली।
बाज जहाँ भी अपना घोंसला बनाता, बज़ वहाँ पहुँच जाती और उसके अंडों को नीचे गिराकर तोड़ देती। बाज बहुत गुस्से में था और उसने ईश्वर से न्याय माँगा। ईश्वर ने बाज के अंडों को अपनी गोद में सुरक्षित रखा, लेकिन बज़ ने एक भारी पत्थर लाकर ईश्वर की गोद में ही दे मारा, जिससे सारे अंडे टूट गए।
अंत में, ईश्वर ने दोनों को बुलाया। बाज ने कहा, "क्या प्रकृति द्वारा दिए गए भोजन को खाना गलत है?" बज़ रोते हुए बोली, "आपने मेरे दोस्त की जान ली है!"
दोनों के बीच समझौता नहीं हो पा रहा था, इसलिए ईश्वर ने एक नया नियम बनाया। अब बाज के अंडे देने के मौसम में मधुमक्खियाँ नहीं होंगी, और जब मधुमक्खियाँ सक्रिय होंगी, तब बाज अंडे नहीं देंगे। इस तरह प्रकृति के संतुलन से समस्या का समाधान हो गया।
Moral
प्रतिशोध केवल दुख लाता है; शांति के लिए संतुलन आवश्यक है।