एक घने जंगल के पास बसे एक शांत गाँव में सोमु नाम का एक बुजुर्ग रहता था। एक दिन, सोमु की मुलाकात अपने पुराने दोस्तों विद्या और रघु से हुई। विद्या बहुत दयालु थी और रघु हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।
रास्ते में चलते हुए, उन्होंने एक गरीब भिखारी को देखा जो बहुत भूखा था। विद्या ने अपनी उंगली से एक कीमती हीरे की अंगूठी निकाली और उसे उस भिखारी को दे दी। भिखारी की आँखों में चमक आ गई। लेकिन, जब वह घर जा रहा था, एक चोर ने उसकी जेब से वह अंगूठी छीन ली और भाग गया। भिखारी बहुत दुखी होकर सड़क किनारे बैठ गया।
अगले दिन, विद्या और रघु उसी रास्ते से गुजर रहे थे। भिखारी को रोते देख विद्या को बहुत बुरा लगा। उसने उसे ढांढस बंधाया और खाने के लिए एक छोटा सोने का सिक्का दिया।
उस सिक्के से भिखारी ने बाज़ार जाकर एक छोटा सा मछली खरीदा। जब वह मछली को एक छोटे से बर्तन में देख रहा था, तब एक चमत्कार हुआ! मछली ने अचानक अपने मुँह से वही हीरे की अंगूठी बाहर निकाल दी। वह अंगूठी मछली के पेट में चली गई थी।
उसी समय, वह चोर भी वहाँ आ गया। भिखारी की हालत देखकर चोर का हृदय परिवर्तन हो गया। उसने अपनी गलती मानी और अंगूठी और सोने के सिक्के वापस कर दिए। यह देखकर विद्या हैरान रह गई। रघु ने मुस्कुराते हुए कहा, "मित्र, जब हम सच्चे दिल से किसी की मदद करते हैं, तो कुदरत उसे किसी न किसी रूप में हमें वापस लौटा देती है।"
Moral
दूसरों की मदद करने का फल हमेशा अच्छा ही होता है।