एक बहुत ही सुंदर और घने जंगल में सभी जानवर मिल-जुलकर रहते थे। एक दिन जंगल के बीचों-बीच एक बड़ा उत्सव मनाया जा रहा था। सभी जानवर बहुत खुश थे और आपस में बातें कर रहे थे।
तभी 'चीकू' नाम का एक खरगोश बहुत तेज़ी से दौड़ता हुआ आया और अपनी शेखी बघारने लगा। "इस पूरे जंगल में मुझसे तेज़ कोई नहीं दौड़ सकता! मैं बिजली की तरह तेज़ हूँ!" उसने गर्व से कहा।
पास ही बैठे 'धीरू' नाम के कछुए ने धीरे से मुस्कुरा दिया। चीकू को यह अच्छा नहीं लगा। उसने गुस्से में पूछा, "तुम क्यों हंस रहे हो? क्या तुम मुझसे मुकाबला कर सकते हो?"
धीरू ने शांति से उत्तर दिया, "सिर्फ तेज़ दौड़ना ही काफी नहीं है। अगर तुम्हें इतना ही विश्वास है, तो चलो एक दौड़ लगाते हैं।"
सभी जानवर इस चुनौती के लिए तैयार हो गए। दौड़ शुरू हुई! चीकू तो पलक झपकते ही बहुत दूर निकल गया। कछुआ बहुत धीरे-धीरे, लेकिन बिना रुके अपनी राह पर चलता रहा।
रास्ते में चीकू ने पीछे मुड़कर देखा। कछुआ तो अभी बहुत पीछे था। चीकू ने सोचा, "इस कछुए को यहाँ पहुँचने में घंटों लगेंगे। क्यों न इस पेड़ की छाँव में थोड़ी देर आराम कर लूँ?" यह सोचकर वह सो गया।
लेकिन कछुआ कहीं नहीं रुका। वह धीरे-धीरे चलता रहा और सोते हुए खरगोश के पास से चुपचाप निकल गया।
जब चीकू की नींद खुली, तो सूरज ढलने वाला था। वह तेज़ी से दौड़कर लक्ष्य तक पहुँचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। धीरू कछुआ पहले ही दौड़ जीत चुका था। चीकू को अपनी गलती और अहंकार का अहसास हुआ।
Moral
धीरज और निरंतर प्रयास से ही सफलता मिलती है।