एक घने और हरे-भरे जंगल में चिनू नाम का एक खरगोश रहता था। चिनू को अपनी दोस्ती पर बहुत घमंड था। उसके दोस्त बंदर, भालू और हाथी जैसे बड़े और ताकतवर जानवर थे। चिनू अक्सर सोचता था, 'जब मेरे पास इतने बड़े दोस्त हैं, तो मेरा क्या बिगड़ सकता है!'
एक दिन, जब चिनू झाड़ियों के पास ताज़ी घास खा रहा था, तभी एक शिकारी कुत्ता वहाँ आ पहुँचा। कुत्ते ने चिनू को देखा और ज़ोर-ज़ोर से भौंकते हुए उसकी ओर दौड़ने लगा। चिनू बुरी तरह डर गया और अपनी जान बचाकर भागने लगा।
वह सबसे पहले पेड़ पर बैठे बंदर के पास पहुँचा और चिल्लाया, "बंदर भाई! मुझे बचाओ! एक शिकारी कुत्ता मेरे पीछे पड़ा है!" बंदर ने लापरवाही से कहा, "अरे चिनू, अभी मैं फल तोड़ने में व्यस्त हूँ। मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता। तुम भालू के पास जाओ।"
चिनू भागकर भालू के पास गया और गिड़गिड़ाया, "भालू भाई! कृपया मेरी मदद करो, कुत्ता मुझे पकड़ने आ रहा है!" भालू ने जम्हाई लेते हुए कहा, "मुझे बहुत नींद आ रही है, मैं नहीं उठ सकता। तुम हाथी के पास जाओ।"
चिनू ने हार नहीं मानी और हाथी के पास पहुँचा। हाथी ने भी कहा, "आज मैं बहुत थका हुआ हूँ, मैं तुम्हारी मदद नहीं कर पाऊँगा। किसी और को ढूँढो।"
चिनू बहुत अकेला और उदास महसूस करने लगा। कुत्ता अब उसके बहुत करीब आ चुका था। चिनू को लगा कि अब सब खत्म हो गया। तभी, पास ही एक छोटी सी झाड़ी के नीचे से पिप नाम की एक नन्ही चुहिया की आवाज़ आई, "चिनू! डरो मत! उस पुराने पेड़ की जड़ों के नीचे एक छोटा सा छेद है, जल्दी उसके अंदर छिप जाओ!"
चिनू बिजली की गति से उस छोटे से छेद के अंदर घुस गया। कुत्ता वहाँ आया और ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा, लेकिन वह छेद इतना छोटा था कि कुत्ता उसके अंदर नहीं जा सका। थोड़ी देर बाद कुत्ता वहाँ से चला गया।
जब चिनू बाहर आया, तो उसकी आँखों में आँसू थे। उसने पिप से कहा, "शुक्रिया पिप! मेरे बड़े दोस्तों ने तो मुँह मोड़ लिया, लेकिन तुमने मेरी जान बचाई।"
पिप मुस्कुराया और बोला, "दोस्त सिर्फ आकार में बड़ा नहीं होता, दोस्त वह है जो मुसीबत में काम आए।"
Moral
सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत के समय काम आए, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो।