एक छोटे से गाँव में सोमू नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसके पास एक बहुत बड़ा बगीचा था, लेकिन वह बहुत ही कंजूस था। उसके पास एक गधा और कुछ छोटे पक्षी थे, लेकिन वह उन्हें कभी सही खाना नहीं देता था। वे जानवर बगीचे में घास और छोटे कीड़े-मकौड़े खाकर अपना गुजारा करते थे।
एक दिन, भूख के कारण एक छोटा पक्षी मर गया। सोमू ने उस पक्षी को बेकार समझकर बगीचे से बाहर फेंक दिया। यह देखकर गधे को एक उपाय सूझा। उसने सोचा, 'यह आदमी हमें तभी तक रखेगा जब तक हम उसके काम के हैं। अगर हम मरे हुए होने का नाटक करें, तो वह हमें बगीचे से बाहर फेंक देगा और हम आज़ाद हो जाएँगे।'
अगली सुबह, गधा ज़मीन पर बिल्कुल स्थिर लेट गया, मानो वह मर गया हो। जब सोमू ने उसे देखा, तो वह चौंक गया। उसे थोड़ी देर के लिए दुख हुआ, लेकिन फिर उसने सोचा, 'यह गधा अब मेरे किसी काम का नहीं है। क्यों न एक गड्ढा खोदकर इसे बगीचे में ही दबा दूँ ताकि यह खाद बन जाए?'
सोमू ने एक गहरा गड्ढा खोदा और उसके अंदर उतर गया। तभी गधे को खतरे का एहसास हुआ। उसे लगा कि वह ज़िंदा दफन होने वाला है। बिना देर किए, गधा पूरी ताकत से भागा और गड्ढे में खड़े सोमू से जा टकराया। सोमू अपना संतुलन खो बैठा और गड्ढे में गिर गया। इसी मौके का फायदा उठाकर गधा तेज़ी से बगीचे से बाहर भाग निकला और आज़ाद हो गया।
Moral
मुसीबत के समय सूझबूझ से काम लेना चाहिए।