एक सुंदर से गाँव में मणी नाम का एक छोटा मेमना रहता था। हर दिन, चरवाहा मणी और उसके साथियों को घास चरने के लिए पास के जंगल में ले जाता था। एक दिन, एक रंगीन तितली का पीछा करते हुए, मणी अपने झुंड से अलग होकर जंगल के काफी अंदर चला गया।
तभी, झाड़ियों के पीछे से एक भूखा भेड़िया निकलकर आया। "वाह! आज तो बहुत ही स्वादिष्ट भोजन मिलेगा!" भेड़िया गुर्राया।
मणी बहुत डर गया था, लेकिन उसने तुरंत अपनी बुद्धि का उपयोग करने का फैसला किया। उसने शांति से कहा, "भेड़िया भाई, आप मुझे अभी मत खाइए। अभी मैं बहुत दुबला हूँ। अगर आप मुझे थोड़ा और घास चरने दें, तो मैं मोटा और रसीला हो जाऊँगा। तब आपको खाने में ज़्यादा मज़ा आएगा!"
लालची भेड़िये ने सोचा कि यह सही है। उसने कहा, "ठीक है, मैं तुम्हारे मोटा होने का इंतज़ार करूँगा।"
कुछ देर बाद, भेड़िया वापस आया। "क्या अब तुम तैयार हो?" उसने पूछा। मणी ने उत्तर दिया, "नहीं, अभी जो घास मैंने खाई है, वह मेरे पेट में ठीक से पची नहीं है। अगर मैं थोड़ा नाचूँ और कूदूँ, तो खाना जल्दी पच जाएगा और मैं और भी मोटा हो जाऊँगा!"
भेड़िया उलझन में पड़ गया। मणी ने सुझाव दिया, "मुझे अकेले नाचने में दिक्कत होती है। अगर आप ज़ोर से गाना गाएँगे, तो मैं आपकी लय पर नाच सकूँगा। इससे मैं बहुत जल्दी मोटा हो जाऊँगा!"
भेड़िये ने मणी की बात मान ली और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर गाना गाने लगा। उसकी आवाज़ पूरे जंगल में गूँजने लगी। चरवाहे ने जब वह तेज़ आवाज़ सुनी, तो वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। वह अपनी लाठी लेकर तुरंत वहाँ पहुँचा।
भेड़िये ने जैसे ही चरवाहे को देखा, वह डरकर भाग गया। चरवाहे ने मणी को गले लगा लिया। मणी बहुत खुश था कि उसकी समझदारी ने उसकी जान बचा ली।
Moral
मुसीबत के समय घबराने के बजाय बुद्धि से काम लेना चाहिए।