मणि और सोमू दो पक्के दोस्त थे जो जंगल की सैर कर रहे थे। अचानक झाड़ियों में हलचल हुई और एक विशाल काला भालू उनकी ओर आता दिखाई दिया।
डर के मारे सोमू ने अपने दोस्त की परवाह किए बिना पास के एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ना शुरू कर दिया। मणि को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। वह चिल्लाया, पर सोमू ने उसकी मदद नहीं की। मणि घबरा गया, लेकिन फिर उसने हिम्मत जुटाई। उसे याद आया कि भालू मरे हुए जानवरों को नहीं खाते।
मणि तुरंत ज़मीन पर लेट गया और अपनी सांस रोक ली। वह बिल्कुल स्थिर रहा, जैसे कि वह मर गया हो। भालू उसके पास आया और उसे सूंघने लगा। मणि की सांसें रुकी हुई थीं, इसलिए भालू को लगा कि वह मर चुका है और वह चुपचाप वहां से चला गया।
जब खतरा टल गया, तो सोमू पेड़ से नीचे उतरा। उसने मज़ाक करते हुए पूछा, "क्या हुआ? भालू ने तुम्हारे कान में क्या कहा?"
मणि धीरे से खड़ा हुआ और शांत स्वर में बोला, "भालू ने एक राज़ बताया। उसने कहा कि ऐसे दोस्त पर कभी भरोसा मत करना जो मुसीबत में साथ छोड़कर भाग जाए।" यह सुनकर सोमू शर्मिंदा हो गया और उसका सिर झुक गया।
Moral
सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत में साथ दे।