एक छोटे से गाँव में बस्टर नाम का एक कुत्ता रहता था। बस्टर बहुत प्यारा था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह कभी भी अपने पास मौजूद चीज़ों से संतुष्ट नहीं होता था। उसे हमेशा लगता था कि उसे कुछ और भी बेहतर मिलना चाहिए।
एक दोपहर, बस्टर को बहुत तेज़ भूख लगी। वह खाने की तलाश में बाज़ार की गलियों में इधर-उधर भटक रहा था। तभी उसे एक दुकान के कोने में एक बड़ी और रसीली हड्डी दिखाई दी। हड्डी को देखकर बस्टर की आँखें चमक उठीं।
'वाह! कितनी शानदार हड्डी है!' उसने सोचा। उसने हड्डी को अपने मुँह में दबाया और खुशी-खुशी अपने घर की ओर दौड़ने लगा।
रास्ते में उसे एक छोटी नदी पार करनी थी, जो एक लकड़ी के पुल से जुड़ी थी। जैसे ही बस्टर पुल के बीच में पहुँचा, उसने नीचे साफ़ पानी में झाँका। उसे पानी में एक और कुत्ता दिखाई दिया! और उस कुत्ते के मुँह में भी एक बड़ी हड्डी थी।
बस्टर के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'उस कुत्ते के पास तो मुझसे भी बड़ी हड्डी है! अगर मैं उसे डरा दूँ, तो शायद वह हड्डी भी मुझे मिल जाए।' बस्टर ने उस दूसरे कुत्ते को डराने के लिए ज़ोर से भौंकने का फैसला किया।
जैसे ही बस्टर ने भौंकने के लिए अपना मुँह खोला, उसकी अपनी हड्डी 'छपाक' से पानी में गिर गई। हड्डी पानी की गहराई में डूब गई और पानी में दिखने वाला वह दूसरा कुत्ता भी गायब हो गया। बस्टर को तुरंत समझ आ गया कि वह कोई दूसरा कुत्ता नहीं, बल्कि उसकी अपनी ही परछाई थी।
बस्टर बहुत दुखी हुआ। उसने महसूस किया कि अगर वह अपनी हड्डी से संतुष्ट रहता, तो आज उसे भूखा नहीं रहना पड़ता। लालच की वजह से उसने अपना खाना भी खो दिया।
Moral
लालच बुरी बला है। जो हमारे पास है, उसी में खुश रहना चाहिए।