एक सुंदर से फार्म हाउस में मनी नाम का एक फुर्तीला मुर्गा रहता था। मनी स्वभाव से बहुत जिज्ञासु था और हर चीज़ को बहुत ध्यान से देखता था।
एक सुबह, जब वह घास के मैदान में दाना चुग रहा था, उसे झाड़ियों के पास कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। वह एक बहुत ही सुंदर और कीमती नीला रत्न था! उसकी चमक देखकर मनी दंग रह गया। वह उस रत्न को अपनी चोंच में दबाकर अपने साथियों को दिखाने के लिए भागा। "देखो! मुझे कितना अद्भुत खजाना मिला है!" वह गर्व से चिल्लाया।
तभी वहाँ एक बूढ़ा और अनुभवी मुर्गा आया। उसने धीरे से कहा, "मनी, यह देखने में तो सुंदर है, लेकिन यह हमारा नहीं है। यह इंसानों की कीमती चीज़ है। अगर यह हमारे पास रहा, तो हमें खुशी नहीं मिलेगी, बल्कि इसे खोने वाले इंसानों को बहुत दुख होगा।"
पहले तो मनी को उसकी बात समझ नहीं आई। लेकिन कुछ ही देर बाद, फार्म हाउस में बहुत शोर-शराबा होने लगा। किसान बहुत परेशान दिख रहा था। वह रोते हुए कह रहा था, "मेरी पत्नी का सबसे प्यारा नीला रत्न खो गया है!"
किसान के चेहरे पर इतनी उदासी देखकर मनी को अहसास हुआ कि वह सुंदर रत्न वास्तव में दूसरों के लिए मुसीबत बन गया है। बूढ़े मुर्गे की बात सच थी। मनी ने तुरंत उस रत्न को अपनी चोंच में उठाया और उसे रास्ते के बीचों-बीच रख दिया ताकि वह आसानी से दिख सके।
थोड़ी ही देर में किसान को वह रत्न मिल गया। उसके चेहरे पर जो राहत और मुस्कान आई, उसे देखकर मनी को बहुत सुकून मिला। मनी ने आज सीखा कि दूसरों की खुशी में ही अपनी असली खुशी है।
Moral
दूसरों को दुख पहुँचाने वाली चीज़ों से बेहतर, सादगी और दूसरों की मदद में ही सच्ची खुशी मिलती है।