बहुत समय पहले की बात है, एक विशाल जंगल में एक बूढ़ा शेर राज करता था। वह बहुत ही शांत और समझदार था। लेकिन उसका बेटा, एक छोटा शेर, बहुत ही जल्दबाज़ और गुस्सैल स्वभाव का था। बूढ़े शेर को पता था कि एक अच्छा राजा बनने के लिए उसके बेटे को धैर्य और समझदारी सीखने की ज़रूरत है।
एक दिन बूढ़े शेर ने अपने बेटे को बुलाया और कहा, "बेटा, अगर तुम इस जंगल के राजा बनना चाहते हो, तो तुम्हें एक काम करना होगा। पहाड़ों की चोटी से सुनहरे फूल लेकर आओ। और हाँ, इस रास्ते में तुम जिन भी जानवरों से मिलो, उनकी समस्याओं को इस डायरी में लिखो।"
नन्हा शेर उत्साह में बोला, "मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है, मैं खुद जाकर आऊंगा!" और वह निकल पड़ा।
यात्रा के दौरान, उसने एक नदी के किनारे एक भालू को उदास बैठे देखा। "भालू भाई, आप इतने दुखी क्यों हैं?" नन्हे शेर ने पूछा। "सूखा पड़ने वाला है, मुझे डर है कि मेरे बच्चों को खाना कैसे मिलेगा," भालू ने कहा। शेर ने यह बात डायरी में लिख ली।
आगे बढ़ने पर, उसने भेड़ के बच्चों को एक झाड़ी के पीछे डरे हुए देखा। "तुम लोग यहाँ क्यों छिपे हो?" उसने पूछा। "हमारा चरवाहा अभी तक नहीं आया है, हमें उसके आने तक यहीं धैर्य से इंतज़ार करना होगा," भेड़ के बच्चों ने कहा। उनकी शांति देखकर शेर हैरान रह गया।
तभी उसने देखा कि एक बाघ एक खरगोश का पीछा कर रहा था। खरगोश फुर्ती से एक बिल में छिप गया। बाघ गुस्सा करने के बजाय, शांति से वहाँ से चला गया। शेर ने सोचा कि गुस्सा करने से काम नहीं बनता।
अंत में, जब वह सुनहरे फूलों की घाटी पहुँचा, तो वहाँ उसे एक बुद्धिमान बंदर मिला। बंदर ने शेर की डायरी पढ़ी और मुस्कुराते हुए कहा, "तुमने बहुत कुछ सीखा है। भालू को चिंता करने के बजाय मेहनत करनी चाहिए, भेड़ के बच्चों ने तुम्हें धैर्य सिखाया, और बाघ ने तुम्हें सिखाया कि गुस्सा करने से शिकार नहीं मिलता। एक राजा को ताकत से ज़्यादा दिमाग और दिल की ज़रूरत होती है।"
नन्हा शेर फूल लेकर घर लौटा। उसके साथ वह बुद्धिमान बंदर भी था। बूढ़ा शेर खुश हुआ क्योंकि उसका बेटा अब केवल एक शक्तिशाली शेर नहीं, बल्कि एक समझदार और दयालु राजा बनने के लिए तैयार था।
Moral
धैर्य, समझदारी और दूसरों के प्रति दया ही एक सच्चे नेता की पहचान है।