एक बहुत ही सुंदर और घने जंगल में कबीलन नाम का एक घोड़ा रहता था। कबीलन को अपनी तेज़ रफ़्तार पर बहुत घमंड था। उसे लगता था कि वह जंगल का सबसे शक्तिशाली जानवर है और उसे कोई नहीं हरा सकता। वह अक्सर रास्ते में मिलने वाले छोटे और धीमे जानवरों का मज़ाक उड़ाया करता था।
एक दिन, कबीलन ने एक नन्हे घोंघे को धीरे-धीरे रेंगते हुए देखा। वह ज़ोर से हँसा और बोला, "अरे नन्हे घोंघे! अगर तुम इसी रफ़्तार से चलते रहे, तो अगले साल तक ही अपनी मंज़िल पर पहुँच पाओगे! मुझे देखो, मैं बिजली की तरह दौड़ता हूँ!"
घोंघे ने शांति से जवाब दिया, "कबीलन, सिर्फ रफ़्तार ही सब कुछ नहीं होती। हर जीव का अपना तरीका होता है।"
कबीलन को यह सुनकर बुरा लगा। उसने चुनौती देते हुए कहा, "अगर तुम्हें इतना ही पता है, तो कल सुबह हमारे बीच दौड़ हो। अगर तुम जीत गए, तो मैं तुम्हारी बात मानूँगा, लेकिन अगर मैं जीता, तो तुम फिर कभी किसी का मज़ाक नहीं उड़ाओगे।"
ya घोंघा मान गया। शाम को घोंघे ने अपने सभी दोस्तों को बुलाया और उन्हें पूरी बात बताई। सभी घोंघों ने मिलकर कबीलन को सबक सिखाने की योजना बनाई।
अगली सुबह दौड़ शुरू हुई। कबीलन बिजली की तरह तेज़ी से भागा। उसे पूरा विश्वास था कि वह जीत जाएगा। लेकिन थोड़ी दूर जाने पर, एक झाड़ी के पीछे से एक घोंघा अचानक रास्ते पर आया और तेज़ी से आगे निकल गया। कबीलन हैरान रह गया। उसने और तेज़ दौड़ना शुरू किया।
कुछ ही देर बाद, एक बड़े पेड़ के नीचे से एक और घोंघा निकला और कबीलन से आगे निकल गया। कबीलन को समझ नहीं आ रहा था कि यह कैसे हो रहा है। वह अपनी पूरी ताकत लगाकर दौड़ता रहा।
अंत में, जब वह फिनिश लाइन के पास पहुँचा, तो एक चट्टान के पीछे से एक तीसरा घोंघा निकला और कबीलन के पहुँचने से ठीक पहले लाइन पार कर गया। कबीलन हाँफते हुए रुक गया। वह दंग था कि एक छोटे से घोंघे ने उसे हरा दिया। उसे समझ आया कि उसने किसी एक घोंघे से नहीं, बल्कि उनकी एकता और चतुराई से मुकाबला किया था।
कबीलन को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह घोंघे के पास गया और बोला, "मुझे माफ़ कर दो दोस्त। मैंने तुम्हारी रफ़्तार का मज़ाक उड़ाया, लेकिन तुम्हारी एकता और समझदारी ने मुझे हरा दिया।"
उस दिन के बाद से कबीलन ने अपना घमंड छोड़ दिया और सभी जानवरों के साथ प्यार से रहने लगा।
Moral
घमंड इंसान का पतन करता है; बुद्धि और एकता में ही असली शक्ति है।