एक घने जंगल के बीचों-बीच एक सुंदर झील थी। उस झील में बहुत सारी छोटी मछलियाँ और कीड़े रहते थे। झील के किनारे एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिस पर करिकालन नाम का एक कौआ रहता था।
एक सुबह, करिकालन को बहुत तेज़ भूख लगी थी। वह भोजन की तलाश में झील के किनारे पहुँचा। वहाँ उसने किनारे पर मछली का एक छोटा सा टुकड़ा देखा। उसे देखते ही करिकालन की आँखें चमक उठीं। उसने सोचा, 'अगर मैं इसे खा लूँ, तो मेरी भूख थोड़ी कम हो जाएगी।'
लेकिन करिकालन बहुत लालची था। उसके मन में एक विचार आया, 'यह छोटा सा टुकड़ा मेरे लिए काफी नहीं है। अगर मैं थोड़ा और इंतज़ार करूँ, तो शायद मुझे कोई बड़ी मछली या मोटा मेंढक मिल जाए। वह एक शानदार दावत होगी!'
उस छोटे टुकड़े को खाने के बजाय, करिकालन एक बड़े शिकार की उम्मीद में चुपचाप बैठ गया। थोड़ी देर बाद एक छोटा मेंढक पास में कूदा। करिकालन उसे पकड़ने ही वाला था, तभी उसने एक बड़ी मछली को तैरते हुए देखा। उसने सोचा, 'मेंढक को छोड़ो, उस बड़ी मछली को पकड़ना ही असली मज़ा है!' और वह मछली के इंतज़ार में बैठ गया।
समय बीतता गया और सूरज डूबने लगा। करिकालन इंतज़ार करता रहा, लेकिन कोई बड़ी मछली किनारे पर नहीं आई। अंधेरा होते ही सभी बड़ी मछलियाँ डरकर झील की गहराई में चली गईं।
भूख से बेहाल और थका हुआ करिकालन अब निराश था। झील के किनारे उसे बस एक छोटा सा घोंघा (snail) दिखाई दिया। उसके पास और कोई रास्ता नहीं था, इसलिए उसे उसी छोटे से घोंघे से अपना पेट भरना पड़ा। बड़ी दावत के चक्कर में, उसने वह छोटा अवसर भी खो दिया जो उसके पास था।
Moral
जो अवसर हाथ में हो उसका लाभ उठाना चाहिए; अत्यधिक लालच सब कुछ छीन लेता है।