एक बहुत बड़े और घने जंगल में गज्जू नाम का एक हाथी रहता था। गज्जू स्वभाव से बहुत ही दयालु था। एक दिन गज्जू बहुत बीमार पड़ गया। उसे तेज़ बुखार था और उसके पैर इतने कमज़ोर हो गए थे कि वह खाने की तलाश में जंगल में चल भी नहीं पा रहा था।
दर्द से परेशान होकर गज्जू एक बड़े बरगद के पेड़ की छाया में लेट गया। जब जंगल के अन्य जानवर वहाँ से गुज़रे, तो गज्जू ने धीमी आवाज़ में कहा, "दोस्तों, मेरी तबीयत बहुत खराब है। क्या कोई मेरे लिए थोड़ा फल और पानी ला सकता है?"
लेकिन हिरणों और खरगोशों ने कहा, "गज्जू, तुम बहुत बड़े हो! तुम्हें जितना खाना चाहिए, उतना हमें लाकर देना मुमकिन नहीं है। हमें अपने काम पर जाना होगा," और वे चले गए।
पास के एक पेड़ पर चीकू नाम का एक छोटा बंदर बैठा था। गज्जू की हालत देखकर चीकू को बहुत दुख हुआ। उसने सोचा, "गज्जू भले ही बड़ा है, पर इस समय उसे मदद की बहुत ज़रूरत है।"
चीकू के पास कुछ मीठे केले थे। वह धीरे से नीचे उतरा और केले गज्जू के पास रख दिए। उसने एक बड़े पत्ते में थोड़ा पानी भरकर लाया और गज्जू को पिलाया। चीकू रोज़ अपने हिस्से का थोड़ा-थोड़ा खाना गज्जू को देने लगा। चीकू की देखभाल से कुछ ही दिनों में गज्जू ठीक हो गया।
गज्जू ने भावुक होकर चीकू से कहा, "चीकू, जब सबने मेरा साथ छोड़ दिया, तब तुमने मेरा साथ दिया। तुम सिर्फ मेरे दोस्त नहीं, मेरे सबसे प्यारे साथी हो।"
उस दिन के बाद से गज्जू और चीकू पक्के दोस्त बन गए। गज्जू चीकू को अपनी पीठ पर बिठाकर पूरे जंगल की सैर कराता था। जब चीकू को ऊँचे पेड़ों से फल चाहिए होते, तो गज्जू अपनी सूंड से उन्हें तोड़कर देता। अगर कोई जानवर चीकू को परेशान करने की कोशिश करता, तो गज्जू उसे डराकर चीकू की रक्षा करता। जंगल के सभी जानवरों ने सीखा कि एक छोटा सा नेक काम कितनी बड़ी दोस्ती ला सकता है।
Moral
छोटा सा नेक काम भी जीवन भर की दोस्ती बना सकता है।