एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। उसके घर के पीछे एक सुंदर बगीचा था, जिसके बीचों-बीच एक विशाल और पुराना आम का पेड़ खड़ा था। सोमू जब छोटा था, तब वह उसी पेड़ से मीठे-मीठे आम तोड़कर खाता था। उस पेड़ की ठंडी छाँव में अपने दोस्तों के साथ खेलना उसकी सबसे प्यारी याद थी। वह पेड़ उसके लिए एक पुराने दोस्त जैसा था।
समय बीतता गया और सोमू अब बूढ़ा हो गया था। वह आम का पेड़ अब फल देना बंद कर चुका था। उसकी बड़ी-बड़ी शाखाएँ बगीचे के अन्य छोटे पौधों को ढक रही थीं। सोमू को लगा कि यह पेड़ अब बेकार है। उसने सोचा, "यह पेड़ अब कोई फल नहीं देता, बस जगह घेर रहा है। इसे काटकर यहाँ नए पौधे लगा देने चाहिए।"
एक सुबह, सोमू कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने के लिए निकला। पेड़ पर रहने वाले पक्षी डर के मारे चहचहाने लगे, "कृपया हमारा घर मत तोड़िए!" गिलहरियाँ भी पेड़ से नीचे उतर आईं और गिड़गिड़ाने लगीं, "अगर यह पेड़ नहीं रहा, तो हम कहाँ जाएँगे?"
लेकिन सोमू ने उनकी एक न सुनी। जैसे ही उसने पेड़ के तने पर कुल्हाड़ी चलाई, पेड़ के एक छोटे से छेद से शहद की एक बूंद नीचे गिरी। सोमू ने उत्सुकता से उस शहद को चखा। वह शहद बहुत ही मीठा था। उस मिठास ने सोमू को उसके बचपन की याद दिला दी—वही पेड़, वही छाँव और वही खुशी।
उसे अचानक अहसास हुआ कि भले ही यह पेड़ उसे फल नहीं दे रहा है, लेकिन यह अनगिनत पक्षियों और जीवों का घर है। जो पेड़ कभी उसका साथी था, वह आज दूसरों का सहारा बना हुआ है। सोमू को अपनी गलती का पछतावा हुआ। उसने कुल्हाड़ी नीचे रख दी और पेड़ को बचाने का फैसला किया। अब वह पेड़ कई जीवों का सुरक्षित बसेरा बन गया।
Moral
दुनिया में कोई भी चीज़ बेकार नहीं होती; हर चीज़ का अपना एक महत्व और उद्देश्य होता है।