एक घने और हरे-भरे जंगल में सोमू नाम का एक लकड़हारा रहता था। वह मेहनती तो था, लेकिन उसमें एक बहुत बड़ी कमी थी—लालच। एक दिन, सोमू अपनी कुल्हाड़ी लेकर जंगल में गया। जैसे ही उसने एक बड़े पेड़ को काटने की कोशिश की, उसकी कुल्हाड़ी का लकड़ी का हत्था अचानक 'कड़क' की आवाज़ के साथ टूट गया।
"ओह नहीं!" सोमू चिल्लाया, "अब मैं काम कैसे करूँगा? बिना हत्थे के यह कुल्हाड़ी तो बेकार है!"
तभी, पास के एक बड़े पेड़ ने बहुत ही कोमल आवाज़ में कहा, "दोस्त, तुम इतने परेशान क्यों हो? क्या तुम्हारी कुल्हाड़ी का हत्था टूट गया है? चिंता मत करो, मेरी एक मज़बूत टहनी ले जाओ। वह तुम्हारे लिए एक बेहतरीन नया हत्था बन जाएगी।"
सोमू हैरान रह गया। उसने पेड़ की टहनी ली और घर जाकर उसे बड़ी मेहनत से तराशकर एक नया हत्था बना लिया। अब उसकी कुल्हाड़ी पहले से भी ज़्यादा मज़बूत हो गई थी।
अगले दिन, सोमू बहुत खुश होकर जंगल लौटा। उसने उस दयालु पेड़ को धन्यवाद दिया। लेकिन जैसे ही सोमू की नज़र पेड़ के मोटे तने पर पड़ी, उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'अगर इस पेड़ ने मुझे इतनी अच्छी टहनी दी है, तो अगर मैं इस पूरे पेड़ को ही काट दूँ, तो मुझे कितना सारा कीमती लकड़ी मिलेगा!'
लालच में आकर सोमू ने जंगल के अन्य पेड़ों को काटना शुरू कर दिया। अंत में, उसने उसी पेड़ को काटने का फैसला किया जिसने उसकी मदद की थी। पेड़ ने उसे रोकने की कोशिश की, पर सोमू नहीं माना। जैसे ही उसने पेड़ पर वार किया, पेड़ ज़ोर से नीचे गिरा और उसके गिरने के झटके से सोमू की नई कुल्हाड़ी का हत्था भी टूट गया। मदद करने वाले पेड़ को काटकर सोमू ने अपना एकमात्र औज़ार भी खो दिया और अकेला रह गया।
Moral
लालच इंसान को उन लोगों का भी दुश्मन बना देता है जो उसकी मदद करते हैं।