एक शांत घाटी में लियो नाम का एक युवा कवि रहता था। लियो को प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह बहुत जल्दी-जल्दी पढ़ता था। वह शब्दों को तो पढ़ लेता था, लेकिन अक्सर कविता की आत्मा और उसके गहरे अर्थ को समझने में चूक जाता था।
एक दिन, एक महान महाकाव्य पढ़ते समय, लियो की नज़र एक पंक्ति पर पड़ी जिसने उसे परेशान कर दिया। पंक्ति थी, 'स्त्रियों ने राजकुमार को कमल जैसी आँखों से देखा।' लियो को लगा कि इसमें कुछ गड़बड़ है। उसने सोचा, 'यह तो गलत है! साहित्य में तो कमल जैसी आँखों का उपयोग स्त्रियों की सुंदरता बताने के लिए किया जाता है। यहाँ राजकुमार के लिए इसका उपयोग करना कवि की गलती है!'
अपनी शंका दूर करने के लिए, लियो गाँव के एक बुद्धिमान बुजुर्ग के पास गया। उसने दुखी होकर कहा, 'महाराज, मुझे लगता है कि उस महान कवि ने एक बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने एक पुरुष की आँखों को कमल जैसा बताकर साहित्य के नियमों का उल्लंघन किया है।'
बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले, 'लियो, तुम केवल शब्दों को देख रहे हो, उनके अर्थ को नहीं। उस वाक्य को ध्यान से देखो। कवि राजकुमार की आँखों को कमल नहीं कह रहे हैं, बल्कि वे यह बता रहे हैं कि स्त्रियों ने उन्हें किस तरह देखा। उन्होंने अपनी आँखों के कोने से, यानी तिरछी नज़रों से देखा। यह उस दृश्य की सुंदरता को दर्शाता है।'
लियो को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने महसूस किया कि जल्दबाजी में उसने एक बहुत ही सुंदर बात को गलत समझ लिया था। उसने विनम्रता से कहा, 'क्षमा करें महाराज, मैंने केवल शब्दों को देखा, उनके पीछे छिपे भाव को नहीं। अब से मैं हर चीज़ को धैर्य और गहराई से समझने की कोशिश करूँगा।'
Moral
किसी भी चीज़ का केवल ऊपरी हिस्सा न देखें, उसके गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करें।