एक घने जंगल के पास बसे गाँव में राम और श्याम नाम के दो दोस्त रहते थे। वे लकड़हारे थे। वे रोज़ सुबह जंगल जाते, लकड़ियाँ इकट्ठा करते और शाम को बाज़ार में बेचकर अपना गुज़ारा करते थे।
एक दोपहर जब वे आराम कर रहे थे, एक बूढ़ा आदमी उनके पास आया। वह बहुत कमज़ोर और भूखा लग रहा था। राम को उस पर दया आ गई और उसने तुरंत अपना खाना उस आदमी को देने का फैसला किया। लेकिन श्याम ने उसे रोक दिया।
श्याम ने कहा, 'राम, अगर हम इसे सिर्फ खाना दे देंगे, तो कल यह फिर से भूखा यहाँ आएगा। हमें इसे खुद कमाने का तरीका सिखाना चाहिए।'
श्याम उस बूढ़े आदमी के पास गया और बड़े प्यार से बात की। उसने देखा कि उस आदमी की कुल्हाड़ी टूटी हुई थी। श्याम ने अपनी एक अतिरिक्त कुल्हाड़ी उसे दे दी और उसे सिखाया कि लकड़ी कैसे काटनी चाहिए और कौन सी लकड़ी सबसे अच्छी होती है।
श्याम की मदद से बूढ़ा आदमी उत्साह के साथ काम करने लगा। शाम को वे तीनों बाज़ार गए। बूढ़े आदमी द्वारा काटी गई लकड़ियाँ बहुत अच्छी थीं, इसलिए वे जल्दी ही अच्छे दामों में बिक गईं।
बूढ़ा आदमी बहुत खुश हुआ। उस कमाई से श्याम ने उसे नए कपड़े और अच्छा भोजन भी दिलाया। राम ने श्याम की प्रशंसा करते हुए कहा, 'मैंने तो बस इसकी भूख मिटानी चाही थी, लेकिन तुमने तो इसे जीवन जीने का रास्ता दिखा दिया।'
उस दिन के बाद से वह बूढ़ा आदमी एक मेहनती लकड़हारा बन गया और सम्मान के साथ रहने लगा।
Moral
किसी को मछली देने से बेहतर है, उसे मछली पकड़ना सिखाना।