एक बहुत ही शांत गाँव में सोमू नाम का एक व्यक्ति रहता था। सोमू बहुत बुद्धिमान और दयालु था। जब भी गाँव में कोई झगड़ा या समस्या होती, सोमू अपनी चतुराई से उसे सुलझा देता था। कभी-कभी गाँव के बड़े काम निपटाने के लिए वह पास के शहर जाकर अधिकारियों से मिलता था।
जब भी सोमू शहर से वापस आता, गाँव वाले उसे घेर लेते थे। "सोमू, क्या आपने राज्यपाल से मुलाकात की?" "सोमू, क्या हमारे लिए कोई नई छूट लाए हैं?" हर कोई उससे सवाल पूछता और उसे परेशान करता। सोमू इस बात से बहुत तंग आ चुका था।
एक बार सोमू अपने एक मित्र के यहाँ शादी में शामिल होने शहर गया था। शादी के बाद जब वह थका-हारा गाँव लौट रहा था, तो उसने सोचा, "अगर मैं सीधे गाँव गया, तो सब लोग मुझे घेर लेंगे और सवाल पूछेंगे। मैं इतना थक गया हूँ, मैं इन सब का सामना कैसे करूँगा?"
तभी उसे एक तरकीब सूझी। वह सीधे घर जाने के बजाय गाँव के बाज़ार में एक ऊँचे मंच पर चढ़ गया। सोमू को देखते ही लोग उत्सुकता से दौड़कर आए। "सोमू! तुम शहर से आ गए! क्या हमारे लिए कोई खुशखबरी लाए हो?" लोग चिल्लाने लगे।
सोमू ने बहुत गंभीर चेहरा बनाया और कहा, "हाँ, मैं खुद राजा से मिला था!"
लोग हैरान रह गए। "क्या! राजा से? राजा ने आपसे क्या कहा? क्या उन्होंने हमारे गाँव के बारे में कुछ पूछा?" सबने उत्साह से पूछा।
सोमू ने धीरे से कहा, "राजा ने मुझे देखकर ज़ोर से कहा, 'ओ मूर्ख! रास्ते से हट जा, वरना घोड़ा तुझे कुचल देगा!'"
लोग उलझन में पड़ गए। "राजा ने ऐसा क्यों कहा?" उन्होंने पूछा।
सोमू मुस्कुराया और बोला, "क्योंकि मैं राजा के रास्ते के बीचों-बीच खड़ा था! ठीक वैसे ही, जैसे मैं अपने निजी काम से शहर जाता हूँ, आप सब मुझे घेर लेते हैं और सवाल पूछते हैं। मैं हर किसी को जवाब नहीं दे सकता। इसलिए, कृपया मुझे परेशान न करें!"
सोमू की यह बात सुनकर गाँव वाले अपनी गलती समझ गए और सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। उस दिन के बाद से, सोमू जब भी कहीं जाता, कोई उसे सवालों से परेशान नहीं करता था।
Moral
दूसरों के निजी मामलों में अनावश्यक दखल नहीं देना चाहिए।