एक घने जंगल के किनारे सोमू और रामू नाम के दो भाई रहते थे। बड़ा भाई सोमू बहुत स्वार्थी था। वह अपनी चीजें या खाना कभी भी रामू के साथ नहीं बांटता था। रामू चाहे कितना भी प्यार दिखाए, सोमू हमेशा उसे छोटा समझकर डांटता रहता था।
एक दिन सोमू जंगल में लकड़ियाँ काटने गया। वहाँ उसने एक जादुई पेड़ देखा, जो चमकते हुए नीले फलों से लदा था। अचानक पेड़ बोलने लगा! "सोमू, कृपया मुझे मत काटो," पेड़ ने विनती की। "अगर तुम मुझे छोड़ दोगे, तो मैं तुम्हें हर महीने पाँच नीले फल दूँगा।"
लेकिन सोमू के लालच ने उसकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी। "हर महीने सिर्फ पाँच फल? अगर मैं इस पूरे पेड़ को ही काट दूँ, तो मैं बहुत अमीर बन जाऊँगा!" उसने चिल्लाकर कहा। गुस्से में आकर पेड़ ने अपनी टहनियों से नुकीले कांटे सोमू पर गिरा दिए। सोमू के पैरों में चोट लग गई और वह दर्द से कराहते हुए जमीन पर गिर पड़ा।
जब शाम तक सोमू घर नहीं लौटा, तो रामू उसे ढूंढते हुए जंगल में गया। उसने देखा कि सोमू दर्द से तड़प रहा है। पेड़ ने रामू से कहा, "इसने मुझे काटने की कोशिश की। अगर तुम इसे यहाँ छोड़कर चले जाओ, तो मैं तुम्हें बहुत सारे फल दूँगा।"
रामू ने बिना सोचे कहा, "मुझे फल नहीं चाहिए, मुझे मेरा भाई चाहिए। मैं उसे इस हालत में छोड़कर कैसे जा सकता हूँ?"
रामू के निस्वार्थ प्रेम को देखकर पेड़ का दिल पिघल गया। पेड़ ने जादू से सोमू के घाव भर दिए और ढेर सारे नीले फल उन पर बरसा दिए। अपने भाई का प्यार देखकर सोमू की आँखों में आँसू आ गए। उसने रामू से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब कभी स्वार्थी नहीं बनेगा। उस दिन के बाद दोनों भाई खुशी-खुशी रहने लगे।
Moral
निस्वार्थ प्रेम ही सबसे बड़ा धन है।