अर्जुन एक ऐसा लड़का था जो हमेशा अपने मोबाइल फोन में खोया रहता था। उसे बाहर की सुंदर दुनिया देखने के बजाय फोन पर वीडियो देखना ज़्यादा पसंद था। एक शनिवार, उसके दोस्त कविन और राहुल ने उसे नीली पहाड़ी की सैर पर चलने के लिए बुलाया।
पहाड़ी की तलहटी में पहुँचते ही कविन उत्साह से बोला, "अर्जुन, इन पेड़ों और पक्षियों को देखो! अगर हम जल्दी ऊपर पहुँच गए, तो हम डूबते हुए सूरज का अद्भुत नज़ारा देख पाएंगे!"
लेकिन अर्जुन ने बिना ऊपर देखे कहा, "बस एक मिनट रुको, मैं इस गेम का अगला लेवल पूरा कर लूँ।" उसके दोस्त हँसे और उत्साह के साथ पहाड़ चढ़ना शुरू कर दिया। वे आपस में बातें करते हुए और ताज़ी हवा का आनंद लेते हुए तेज़ी से ऊपर बढ़ने लगे।
वहीं अर्जुन बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। उसकी आँखें लगातार फोन पर टिकी थीं, जिसकी वजह से वह पत्थरों और जड़ों से टकराकर गिरते-गिरते बचा। वह फोन में इतना मग्न था कि उसने न तो पक्षियों का चहचहाना सुना और न ही फूलों की खुशबू महसूस की।
जब अर्जुन हाँफते हुए पहाड़ की चोटी पर पहुँचा, तब तक सूरज डूब चुका था। आसमान में वह सुनहरा और नारंगी रंग गायब हो चुका था और अंधेरा छाने लगा था। उसके दोस्त पहाड़ी पर बैठकर उस सुंदर सूर्यास्त का आनंद ले चुके थे।
राहुल ने धीरे से कहा, "अर्जुन, अगर तुम थोड़ा जल्दी आते तो यह नज़ारा देख पाते।"
अर्जुन ने अपने फोन की ओर देखा। उस छोटी सी स्क्रीन में अब उसे कोई खुशी नहीं मिल रही थी। उसे एहसास हुआ कि फोन के चक्कर में उसने जीवन का एक अनमोल पल गँवा दिया है। उसने सीखा कि समय बहुत कीमती है और बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता।
Moral
समय बहुत कीमती है; एक बार हाथ से निकल जाने पर यह वापस नहीं आता।