एक घने और हरे-भरे जंगल में गजेंद्र नाम का एक विशाल हाथी रहता था। गजेंद्र इतना बड़ा था कि जब वह चलता था, तो ज़मीन कांपने लगती थी। उसके विशाल शरीर को देखकर जंगल के अन्य छोटे जानवर—जैसे खरगोश, हिरण और बंदर—उसे देखते ही डर के मारे भाग जाते थे। बड़े जानवर छोटे बच्चों को चेतावनी देते थे, 'उस विशाल हाथी से दूर रहो, वह बहुत खतरनाक है!' इससे गजेंद्र को बहुत दुख होता था। वह अक्सर सोचता, 'मैंने तो कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया, फिर सब मुझसे डरते क्यों हैं?'
एक दिन जंगल में बहुत तेज़ बारिश होने लगी। बारिश इतनी ज़ोरदार थी कि जंगल की छोटी नदियाँ उफान पर आ गईं। छोटे जानवरों के रहने वाले निचले इलाके पानी में डूब गए। बहुत सारे छोटे जानवर और उनके बच्चे एक ऊँचे टीले पर फंस गए। पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था, जिससे वे भोजन की तलाश में बाहर नहीं निकल पा रहे थे। सभी जानवर भूख और डर से व्याकुल थे।
तभी गजेंद्र वहाँ से गुज़रा। उसने देखा कि सभी जानवर पानी में फंसे हुए हैं। वह धीरे-धीरे उनके पास गया, लेकिन जानवरों ने डरकर एक-दूसरे से सटकर खुद को बचाने की कोशिश की। तभी एक छोटे बंदर के बच्चे ने चिल्लाकर कहा, 'बड़े हाथी दादा, कृपया हमें चोट मत पहुँचाना! हम बहुत भूखे और डरे हुए हैं!'
गजेंद्र ने बहुत प्यार से कहा, 'मुझसे डरो मत। मुझे पता है कि तुम मुझे एक राक्षस समझते हो, लेकिन मैं यहाँ तुम्हारी मदद करने आया हूँ।' उस छोटे बंदर ने हिम्मत जुटाकर कहा, 'मेरे माता-पिता ने कहा था कि आपके आकार से डरना चाहिए, लेकिन मैंने आपको देखा है। आप बहुत शांत हैं और किसी को परेशान नहीं करते। मुझे पता है कि आप एक अच्छे हाथी हैं।'
गजेंद्र को यह सुनकर बहुत खुशी हुई। उसने तुरंत अपनी लंबी सूंड पानी के ऊपर बढ़ाई। छोटा बंदर उस पर चढ़ गया और गजेंद्र ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया। इसके बाद, गजेंद्र ने एक-एक करके सभी जानवरों को अपनी पीठ और सूंड की मदद से सुरक्षित सूखी ज़मीन पर पहुँचाया।
उस दिन के बाद से, जानवरों ने गजेंद्र को कभी राक्षस नहीं समझा। उन्होंने उसे जंगल का रक्षक और अपना सबसे अच्छा दोस्त माना। गजेंद्र अब अकेला नहीं था; वह अपने नए दोस्तों के साथ जंगल में खुशी-खुशी रहने लगा।
Moral
किसी के बाहरी रूप को देखकर उसके स्वभाव का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए।