एक शांत घाटी में कवि नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत जिज्ञासु था और हमेशा नई चीज़ें सीखना चाहता था। एक दिन जंगल में घूमते समय उसे एक चमकता हुआ अनोखा पत्थर मिला। उसने उस पत्थर को अपने घर लाया और कई दिनों तक उस पर शोध किया। उसने पाया कि वह पत्थर अंधेरे में रोशनी देता है।
जल्द ही यह खबर पूरे गाँव में फैल गई। लोग कहने लगे, 'कवि तो बहुत बड़ा विद्वान है!' एक दिन एक अमीर व्यापारी गाँव आया और कवि की प्रशंसा करते हुए बोला, 'तुम तो जीनियस हो! तुम बड़े होकर दुनिया बदल दोगे!'
कवि को प्रशंसा सुनकर खुशी नहीं हुई, बल्कि उसने बहुत ही विनम्रता से जवाब दिया। उसने कहा, 'श्रीमान, कृपया मुझे इतना बड़ा न कहें। मैं तो उस विशाल समुद्र के किनारे बैठा एक छोटा बच्चा हूँ, जो लहरों के साथ आए छोटे-छोटे कंकड़ों को इकट्ठा कर रहा है। मुझे अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।'
कवि की यह बात सुनकर व्यापारी दंग रह गया। उसने समझा कि असली महानता प्रशंसा में नहीं, बल्कि विनम्रता में होती है।
Moral
सच्चा ज्ञान विनम्रता लाता है।