नीले पहाड़ों के जंगल में लूना नाम की एक नन्ही खरगोश रहती थी। लूना में एक कमी थी; उसके एक कान से सुनाई नहीं देता था और उसकी एक आँख ही ठीक से काम करती थी। यह देखकर लूना के माता-पिता हमेशा उदास रहते थे, जिससे लूना का आत्मविश्वास कम हो गया था। उसे लगता था कि वह दूसरों की तरह सक्षम नहीं है।
एक दिन, लूना के दादाजी उससे मिलने आए। उन्होंने लूना की कमी को उसकी कमजोरी नहीं माना। उन्होंने देखा कि लूना के पास कुछ खास है। क्योंकि उसका एक कान नहीं सुनता था, उसका दूसरा कान बहुत तेज़ हो गया था, जो हवा की हल्की सी सरसराहट भी सुन सकता था। साथ ही, उसकी एक आँख इतनी तेज़ थी कि वह दूर की हलचल भी देख सकती थी।
तभी जंगल में शिकारियों का एक समूह आ गया। उन्होंने जंगल को चारों ओर से घेर लिया और जानवरों को डराने लगे। सभी जानवर डर के मारे कांपने लगे। "हम कहाँ जाएँ?" सब घबराकर पूछने लगे।
लूना के दादाजी ने सुझाव दिया, "हमें शिकारियों की गतिविधियों पर नज़र रखनी होगी। जब वे आराम करें, तब हम निकल सकते हैं।"
लेकिन जानवर बहुत डरे हुए थे। तभी लूना हिम्मत करके आगे आई। उसने कहा, "मैं मदद कर सकती हूँ! मेरे तेज़ कान बता रहे हैं कि बाईं ओर के शिकारी शोर कर रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं।"
फिर लूना एक ऊँची चट्टान पर चढ़ गई। उसने कहा, "और मेरी तेज़ आँख देख रही है कि दाईं ओर का रास्ता खाली है! वहाँ के शिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं और कोई पहरा नहीं दे रहा है।"
लूना की हिम्मत देखकर सभी जानवर उसके पीछे चल दिए। लूना ने उन्हें बहुत सावधानी से रास्ता दिखाया। सोते हुए शिकारियों के पास से बिना कोई आवाज़ किए, सभी जानवर सुरक्षित जंगल से बाहर निकल गए।
सभी जानवरों ने लूना का धन्यवाद किया। लूना को समझ आ गया कि जिसे वह अपनी कमी समझती थी, वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी। अब लूना खुद पर गर्व करती थी।
Moral
हमारी कमियाँ भी हमारी ताकत बन सकती हैं, यदि हम उन्हें समझदारी और साहस से इस्तेमाल करें।