एक घने जंगल के बीचों-बीच एक साफ़ पानी का तालाब था। उस तालाब के किनारे कापी नाम का एक बंदर और मंद नाम का एक कछुआ रहते थे। दोनों बहुत पक्के दोस्त थे।
एक दोपहर, कापी ने तालाब में तैरने की कोशिश की। वह अपने हाथ-पैर तो खूब चला रहा था, लेकिन उसे तैरना नहीं आता था, इसलिए वह बार-बार डूब रहा था। वहीं दूसरी ओर, मंद बहुत ही आसानी और सुंदरता से पानी में तैर रहा था।
मंद को तैरते देख कापी को थोड़ी जलन हुई। उसने पूछा, 'मंद, तुम इतनी आसानी से बिना डरे कैसे तैर लेते हो?'
मंद ने मुस्कुराकर जवाब दिया, 'मेरे शरीर पर जो सख्त कवच है, वह मुझे पानी में तैरने और सुरक्षित रहने में मदद करता है।'
कापी ने एक मूर्खतापूर्ण विचार सोचा। उसने सोचा, 'अगर कवच होने से तैरना आसान है, तो मैं भी एक कवच बना लेता हूँ।' उसने पास के पेड़ से ढेर सारा सूखा रुई इकट्ठा किया और उसे बेलों की मदद से अपनी पीठ पर एक बड़े गोले की तरह कसकर बाँध लिया। 'अब मेरे पास भी तुम्हारी तरह एक बड़ा कवच है!' यह कहते हुए कापी तालाब में कूद गया।
लेकिन जैसे ही कापी पानी में गिरा, मुसीबत शुरू हो गई। रुई ने तुरंत पानी सोख लिया और वह बहुत भारी हो गया। उस भारी रुई ने कापी को नीचे की ओर खींचना शुरू कर दिया। कापी अपने हाथ-पैर भी नहीं हिला पा रहा था और डूबने लगा।
मंद ने तुरंत खतरा भाँप लिया। उसने अपने अन्य कछुआ दोस्तों को मदद के लिए बुलाया। सबने मिलकर कापी की पीठ से उस भारी रुई को खींचकर अलग कर दिया। रुई हटते ही कापी हाँफते हुए पानी से बाहर आया।
अपनी मूर्खता पर कापी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने समझ लिया कि दूसरों की नकल करने की कोशिश करना भारी पड़ सकता है।
Moral
दूसरों की बिना सोचे-समझे नकल न करें; अपनी प्रकृति को समझें।