एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन बहुत होनहार था, लेकिन उसे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। उसका मन हमेशा अशांत रहता था, जैसे कोई मुरझाया हुआ फूल हो।
एक शाम, उसके दादाजी ने उसे पास बिठाया और कहा, 'आर्यन, हमारा मन एक कोमल फूल की तरह है। यदि तुम इसमें क्रोध और ईर्ष्या की खरपतवार उगने दोगे, तो यह मुरझा जाएगा। लेकिन यदि तुम इसे ईश्वर की भक्ति और प्रेम से सींचोगे, तो यह खिल उठेगा।'
आर्यन ने पूछा, 'इसका क्या अर्थ है, दादाजी?'
दादाजी ने समझाया, 'जो लोग अपने मन के फूल पर विराजमान उस ईश्वर के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देते हैं, यानी जो अपने विचारों को शुद्ध और पवित्र रखते हैं, वे इस संसार में सदा के लिए अमर और महान बन जाते हैं।'
आर्यन ने इसे अपने जीवन में उतारने का निर्णय लिया। उसने धीरे-धीरे अपने क्रोध पर नियंत्रण पाना सीखा। उसने दूसरों की मदद करना और विनम्र रहना शुरू किया। जैसे-जैसे उसका मन शांत हुआ, उसके जीवन में एक नई चमक आ गई। लोग उसकी बुद्धिमानी से ज्यादा उसके शांत और दयालु स्वभाव के कारण उसका सम्मान करने लगे। उसने महसूस किया कि सच्चे सुख और सम्मान का मार्ग मन की पवित्रता से होकर गुजरता है।