एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उस साल गर्मी बहुत तेज़ थी। ज़मीन फट गई थी और कुएँ सूख गए थे। लियो बहुत उदास था। उसने पूछा, 'दादाजी, अगर फसलें सूख गईं तो हम क्या खाएंगे?'
दादाजी ने उसे समझाया, 'घबराओ मत लियो, प्रकृति का चक्र हमेशा चलता रहता है। जब बारिश आएगी, तो वह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि जीवन लेकर आएगी।'
कुछ दिनों बाद, आसमान में काले बादल छा गए और ज़ोरदार बारिश होने लगी। लियो खिड़की से बारिश देखते हुए बहुत खुश हुआ। धीरे-धीरे सूखे खेत हरे-भरे हो गए और फसलें लहलहाने लगीं। तालाब और कुएँ भी पानी से भर गए।
कुछ समय बाद जब लियो खाना खा रहा था, तो उसने कहा, 'दादाजी, यह अनाज बारिश की वजह से उगा है और यह पानी भी बारिश का ही है!'
दादाजी मुस्कुराए और बोले, 'बिल्कुल सही लियो, बारिश ही भोजन पैदा करती है और वही हमारे पीने का आधार भी है।' लियो ने आसमान की ओर देखकर बारिश का शुक्रिया अदा किया।