एक छोटे से गाँव में आर्यन और उसके पिता रवि रहते थे। रवि एक किसान थे। एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। बारिश न होने के कारण खेत सूख गए और कुएँ खाली हो गए। गाँव के लोग दाने-दाने को तरसने लगे।
आर्यन का दोस्त अर्जुन हमेशा गर्व से कहता था कि उसका परिवार बहुत दान करता है। लेकिन जब बारिश नहीं हुई और फसलें बर्बाद हो गईं, तो अर्जुन के परिवार के पास भी किसी की मदद करने के लिए कुछ नहीं बचा। भूख और प्यास के कारण लोग अपने ही अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे थे।
आर्यन ने अपने पिता से पूछा, 'पिताजी, हम दूसरों की मदद क्यों नहीं कर पा रहे हैं?' रवि ने आसमान की ओर देखते हुए कहा, 'बेटा, हम कितने भी अच्छे क्यों न हों, दूसरों को देने के लिए हमारे पास संसाधन होने चाहिए। अगर आसमान से बारिश नहीं बरसेगी, तो फसलें नहीं उगेंगी। फसलें नहीं होंगी, तो न भोजन होगा और न ही धन। और बिना धन के हम न तो दान कर पाएंगे और न ही ईश्वर की भक्ति कर पाएंगे।'
कुछ समय बाद, काले बादल छाए और झमाझम बारिश हुई। धरती फिर से हरी-भरी हो गई। फसल कटने के बाद, रवि ने अपनी उपज का एक हिस्सा जरूरतमंदों में बाँटा। आर्यन समझ गया कि इस दुनिया में अच्छाई और दान बनाए रखने के लिए वर्षा का होना कितना जरूरी है।